समलैंगिक संबंधों को अवैध और अपराध करार दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने समलैंगिकों को राहत देने के संकेत दिए हैं।
कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने यह कह कर राहत के संकेत दिए कि संसद कानून बनाने संबंधी अपने विशेषाधिकार का उपयोग करेगी।
इस बीच फैसले पर जहां धार्मिक संगठनों ने खुशी जताई, वहीं विभिन्न दलों के सांसदों और कई संगठनों ने निराशा जाहिर की। हालांकि विभिन्न दल इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से बचते दिखे।
कांग्रेस ने जहां इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के फैसले के साथ खड़े होने की बात कही, वहीं भाजपा ने राहत के सवाल पर सरकार के पहल करने के बाद ही प्रतिक्रिया देने की बात कही।
जदयू सांसद शिवानंद तिवारी ने तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए दावा किया कि समलैंगिक संबंधों को महाभारत काल में भी समाज की मान्यता प्राप्त थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कानून मंत्री ने समलैंगिकों को राहत देने का संकेत देते हुए कहा कि संसद कानून बनाने का अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करेगी।
फैसले के संदर्भ में उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत को कानून की संवैधानिकता परखने का विशेषाधिकार है। वह अपने इसी विशेषाधिकार का उपयोग कर रही है। ठीक इसी तरह कानून बनाने का विशेषाधिकार संसद के पास है और हम उस विशेषाधिकार का उपयोग करेंगे।
सिब्बल ने यह भी कहा कि अगर संसद चले तो सरकार इसी सत्र में वैधानिक रास्ता तलाशने के लिए तैयार है। सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने भी फैसले का संज्ञान लेने की बात कही।
कांग्रेस सांसदों ने जाहिर की आलोचना
उधर इस फैसले का सभी धार्मिक संगठनों ने स्वागत किया तो कई सांसदों ने निराशा जाहिर की। जदयू के शिवानंद तिवारी, कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर सहित कई नेताओं ने फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। अय्यर ने वैज्ञानिक पक्ष प्रस्तुत करते हुए इस फैसले की आलोचना की।
कांग्रेस के संदीप दीक्षित ने कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी अटार्नी जनरल के हाईकोर्ट में रखे गए पक्ष की समर्थक है। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट में अटार्नी जनरल ने समलैंगिक संबंधों को कानूनी मान्यता देने की मांग की थी।
फैसले से निराश बॉलीवुड
समलैंगिकता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर बॉलीवुड ने भी निराशा जाहिर की है। अभिनेता आमिर खान ने कहा कि यह मानवाधिकारों का हनन है। यह शर्मनाक है। वहीं, जॉन अब्राहम ने ट्वीट किया कि भारत ने फिर अपनी पुरानी पक्षपातपूर्ण नीतियों को जारी रखा है। फिल्म निर्माता ओनीर ने कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र के लिए खराब दिन है। सुप्रीम कोर्ट ने 153 साल पुराने कानून को सही करार देकर हमें पीछे धकेल दिया है।