भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया के १० देशों के संगठन आसियान के साथ सेवा व निवेश क्षेत्र में मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इन समझौतों के जरिए भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच आईटी, मेडिकल, होटल और बैंकिंग से जुड़े क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसका सबसे ज्यादा फायदा सेवा क्षेत्रों से जुड़े प्रोफेशनल्स को मिलने की उम्मीद है। एफटीए के चलते इन देशों में भारतीय प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान हो जाएगी।
भारत आसियान के साथ वस्तुओं के मुक्त व्यापार के लिए २००९ में समझौता कर चुका है, जो वर्ष २०१० में लागू हुआ था। हालांकि, इस समझौते से भारत को उम्मीदों के मुताबिक फायदा नहीं मिला और आसियान के साथ निर्यात के मुकाबले आयात तेजी से बढ़ा है। लेकिन सेवा क्षेत्र में भारत की मजबूती को देखते हुए हालिया समझौते को फायदेमंद माना जा रहा है। यही वजह है कि आसियान के कई देश भारत के साथ सेवा क्षेत्र में मुक्त व्यापार समझौते से हिचक रहे थे। भारत सरकार का मानना है कि सेवा क्षेत्र में हुए समझौते से आसियान के साथ व्यापार घाटा (आयात-निर्यात का अंतर) घटाने में मदद मिलेगी।
आसियान देशों में ब्रूनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं। इनमें से फिलीपींस को छोड़कर सभी देश भारत के साथ सेवा व निवेश के लिए मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। गत २६ अगस्त को म्यांमार में हुई आसियान के आर्थिक मंत्रियों की बैठक में भारत को इस समझौते पर हस्ताक्षर करने थे, लेकिन वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण को आखिरी समय में जन-धन योजना की लांचिंग के चलते अपनी यात्रा स्थगित करनी पड़ी।
उद्योग जगत ने आसियान के साथ हुए इस समझौते का स्वागत करते हुए दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ निवेश व सेवा क्षेत्र में कारोबार बढऩे की उम्मीद जताई है। फिक्की का कहना है कि इस एफटीए की मदद से भारतीय सेवा प्रदाताओं तथा पेशेवरों की इन बाजार पहुंच बढ़ेगी। आसियान क्षेत्र भारत को स्वास्थ्य सेवा, लेखा, दूरसंचार और आईटी जैसे क्षेत्रों में काफी अवसर उपलब्ध कराएगा।