वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सुस्त पड़े इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में जाने फूंकने के लिए सड़क, बिजली, पानी, एविएशन क्षेत्र में ढांचागत सुधार के कदम उठाए हैं।
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वित्त मंत्री ने बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए इंडस्ट्री को टैक्स छूट से लेकर अभी तक जारी विवादों को जल्द हल करने का भी भरोसा दिया है। साल 2014-15 में सड़क क्षेत्र के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को 37,880 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
इसी तरह बिजली संकट को दूर करने के लिए कोयले की आपूर्ति सुचारु रुप से करने के साथ-साथ बिजली उत्पादन, वितरण में काम करने वाली कंपनियों को 10 साल का टैक्स हॉलीडे भी दिया है।
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इंडस्ट्री के अनुसार वित्त मंत्री ने बुनियादी मुद्दों को दूर करने की कोशिश की है। हालांकि मोदी सरकार की यह पहल जमीनी स्तर पर कितनी कारगर होगी, यह सबसे बड़ा इम्तिहान होगा।
सड़क क्षेत्र को 37,880 करोड़
सड़क क्षेत्र को 37,880 करोड़ वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा है कि सार्वजनिक-निजी-भागीदारी (पीपीपी) भारत में एयरपोर्ट, बंदरगाह और हाइवे बनाने में कई मामलों में सफल रही है। हालांकि इस पीपीपी मॉडल में कुछ कमियां हैं, इसे देखते हुए विवादित मुद्दे जल्द से जल्द निपटाए जाएंगे। इसके लिए एक 3पी इंडिया मॉडल विकसित किया जाएगा, जिसके लिए 500 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राज्य सड़कों को 37,880 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। जिसमें 3000 करोड़ रुपए पूर्वोत्तर भारत के लिए है। कुल 8500 किमी लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने का भी लक्ष्य तय किया गया है। चुनिंदा हाइवे को इंडस्ट्रियल कॉरीडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। जिसके लिए एनएचएआई को 500 करोड़ रुपए की राशि दी गई है।
बिजली कंपनियों को 10 साल का टैक्स हॉलीडे मार्च 2017 तक बिजली उत्पादन, वितरण और ट्रांसमिशन का काम शुरू करने वाली कंपनियों को 10 साल का टैक्स हॉलीडे मिलेगा। यह छूट पिछले साल खत्म हो गई थी। सरकार ने इसे फिर से लागू कर दिया है।
इसके अलावा अल्ट्रा मॉडर्न सुपर क्रिटिकल कोल बेस्ड थर्मल पॉवर तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रारंभिक आवंटन किया गया है। एसोसिएशन ऑफ पॉवर प्रोड्यूसर्स के डायरेक्टर जनरल अशोक खुराना के अनुसार बिजली क्षेत्र के लिए सरकार ने अहम कदम उठाए हैं। टैक्स हॉलीडे लागू करना काफी सकारात्मक कदम है।
छोटे शहरों में बनेंगे एयरपोर्ट
छोटे शहरों में बनेंगे एयरपोर्ट टियर-1 और टियर-2 शहरों में एयरपोर्ट बनाने की तैयारी है। इसके लिए सरकार एक नई स्कीम लांच करेगी। एयरपोर्ट बनाने का काम एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया या पीपीपी मॉडल के तहत किया जाएगा।
हालांकि मोदी सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी। यूपीए सरकार भी ऐसी योजनाएं ला चुकी थी, लेकिन प्रासंगिकता न होने की वजह से यह मामले अटके रहे।
गंगा जल मार्ग विकास इलाहाबाद से हल्दिया तक जल मार्ग विकसित करने के लिए जल मार्ग विकास प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। जल मार्ग की लंबाई 1620 किमी होगी। जिसका इस्तेमाल वाणिज्यिक उत्पादन के लिए किया जाएगा। इसके लिए 4200 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।
15,000 किमी लंबी गैस पाइपलाइन
15,000 किमी लंबी गैस पाइपलाइन देश में पीएनजी का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए 15,000 किमी लंबी गैस पाइप लाइन बिछाई जाएगी। अभी देश में कुल 15,000 किमी की पाइप लाइन बिछाई गई है। आगे पूरे देश में गैस ग्रिड विकसित होगी। सरकार 15,000 किमी पाइपलाइन के लिए पीपीपी मॉडल को लागू करेगी।
सौर ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, लद्दाख में अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर प्रोजेक्ट्स लगाए जाएंगे। इसके लिए 500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इसके अलावा कृषि पंपसेट के लिए सौर ऊर्जा स्कीम लांच की जाएगी। जिसके लिए 400 करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान किया गया है।
नहरों के किनारे 1 मेगावाट क्षमता वाले सोलर पार्क भी विकसित किए जाएंगे। चालू वित्त वर्ष में ग्रीन एनर्जी कॉरीडोर प्रोजेक्ट को भी लागू करने की योजना है। ईवीए शीट और बैक शीट के निर्माण पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई है। इसी तरह पीवी रिबन के फ्लैट कॉपर वॉयर पर भी कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। साथ ही सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट लगाने पर 5 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी को बरकरार रखा गया है।
बनेंगी 16 नई बंदरगाह परियोजनाएं देश में 16 नई बंदरगाह परियोजनाएं शुरू करने की तैयारी है। जिसके लिए जरूरी कार्यवाही इस साल पूरी कर ली जाएगी। जिसका प्रमुख उद्देश्य बंदरगाहों से कनेक्टिविटी बढ़ाना होगा।
तूतीकोरन के चरण-1 प्रोजेक्ट के लिए 11,635 करोड़ रुपए का प्रावधान है। साथ ही कांडला और जेएनपीटी में सेज भी विकसित किए जाएंगे। सरकार इस साल एक शिपिंग इंडस्ट्री के लिए नीति की भी घोषणा करेगी।
कोयला और खनन के मुद्दे जल्द दूर करने पर फोकस कमीशन हो चुके या फिर मार्च 2015 तक पूरे होने वाले प्रोजेक्ट को सबसे पहले कोयले की आपूर्ति की जाएगी। कोल लिंकेज की समस्याओं को भी हल कर बिजली लागत कम करने पर सरकार का जोर होगा।
इसी तरह खनन क्षेत्र में पर्यावरण और दूसरे मुद्दों को हल करने की बात वित्त मंत्री ने कही है। साथ ही जरूरत पड़ने पर एमएमडीआर एक्ट-1957 में संशोधन की भी बात कही गई है। खनन क्षेत्र में रॉयल्टी रेट भी सरकार संशोधित करने पर विचार कर रही है।