मंगलवार को केंद्र सरकार में वित्त मंत्री के रूप में पदभार संभालने वाले अरुण जेटली ने महंगाई में कमी लाने को अपनी पहली प्राथमिकता बताया है।
पदभार संभालने के बाद उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन से मुलाकात में इसे लेकर चर्चा भी की। नए वित्त मंत्री ने राजन के साथ 3 जून को आने वाली मौद्रिक नीति और अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भी चर्चा की।
मंगलवार को वित्त मंत्रालय का पदभार संभालते वक्त अरुण जेटली ने कहा कि वह ऐसे समय में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब कई सारी चुनौतियां सामने हैं।
कैसे कम होगा घाटा?
उन्होंने कहा कि सबसे पहले महंगाई में कमी लाना और विकास दर में तेजी लाना हमारी प्राथमिकता होगी। इन दोनों के बीच संतुलन बनाने के कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा राजकोषीय हालत को बेहतर करने पर फोकस होगा।
जेटली के अनुसार मजबूत सरकार आने से निवेशकों को बेहतर संकेत मिले हैं। ऐसे में हमें उम्मीद है कि इसका फायदा हमें बेहतर रूप से मिलेगा।
नए वित्त मंत्री की प्रमुख चुनौतियां
-ऊंची महंगाई दर, थोक मूल्य सूचकांक अभी भी आरबीआई के सामान्य स्तर से ज्यादा, वित्त वर्ष 2013-14 में 6 फीसदी
-आर्थिक विकास दर मौजूदा समय में पांच फीसदी से भी नीचे
-बैंकों का सकल एनपीए बढ़कर मार्च 2014 तक 4.44 फीसदी के चिंताजनक स्तर पर
-राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2013-14 में जीडपी का 4.6 फीसदी
उद्योग जगत और निवेशकों की क्या है उम्मीद
-रेट्रोस्पेक्टिव कानून (पुरानी अवधि से टैक्स लेना) को वापस लेना
-जीएसटी और डीटीसी को जल्द लागू किया जाए
-एफडीआई निवेश के लिए बने देश में अनुकूल माहौल
-ब्याज दरों में कटौती कर सस्ता किया जाए कर्ज
-सरकार की उद्योग संबंधी नीतियों में हो स्थिरता