महंगाई की मार से जूझ रहे आम आदमी के लिए पेट भरना मुश्किल होता जा रहा है।
खुद सरकारी आंकड़े बताते हैं कि गत अगस्त में खाने-पीने के चीजों की महंगाई 18.18 फीसदी बढ़ी है जो दिसंबर 2010 के बाद सर्वाधिक है।
थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर 6.10 फीसदी बढ़ी है, जो पिछले छह महीने में सबसे ज्यादा है। महंगाई की आग सबसे अधिक महंगी सब्जियों और ईंधन की वजह से भड़की है।
पिछले साल के मुकाबले प्याज 245 फीसदी (करीब ढाई गुना) महंगा हुआ, जबकि सब्जियों के दाम 78 फीसदी बढ़ गए हैं।
डीजल पर 27 फीसदी और एलपीजी पर करीब 8 फीसदी महंगाई बढ़ी है। बढ़ती महंगाई ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर पानी फेर सकती है।
वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, कारखानों में बनने वाले सामानों की महंगाई अगस्त में सिर्फ 1.9 फीसदी बढ़ी है, लेकिन थोक महंगाई दर में करीब 14 फीसदी महत्व रखने वाली खाने-पीने की चीजों की महंगाई 18 फीसदी बढ़ने से कुल महंगाई दर छह महीने में सबसे ज्यादा रही है।
इस दौरान दालें जरूर 14 फीसदी सस्ती हुई लेकिन चावल पर बढ़ी 20 फीसदी महंगाई ने हिसाब बराबर कर दिया। इसी तरह आलू के दाम में 15 फीसदी घटे लेकिन अंडा, मांस और मछली 19 फीसदी महंगे हो गए।
खाद्य तेल और चीन पर करीब 4 फीसदी महंगाई घटी है, लेकिन फल 8 और दूध 6 फीसदी महंगा हो गया है।