रिसर्च फर्म जाइफिन की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय उपभोक्ताओं के भरोसे में कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में लगातार दूसरे महीने उपभोक्ताओं का भरोसा (कंज्यूमर कांफिडेंस) घटा है। हालांकि इसे अभी एक ट्रेंड नहीं कहा जा सकता, फिर भी इससे पता चलता है कि केंद्र में नई सरकार बनने से जगा उत्साह अब ठंडा पड़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नई सरकार बनने के बाद भी देश के आर्थिक हालात में कोई बड़ा बदलाव न दिखाई देने से लोगों के उत्साह में कमी आई है। इसके अलावा कंज्यूमर कांफिडेंस में कमी की प्रमुख वजहों में नौकरी की सुरक्षा (जॉब सिक्योरिटी) में कमी और बड़ी खरीद की इच्छा में कमी बनी रहना भी है।
अगस्त में देश का कंज्यूमर आउटलुक इंडेक्स (सीओआई) 43.6 अंक पर रहा। यह जुलाई की तुलना में 0.6 अंक कम रहा। इससे लोगों के खर्चे करने के रुझान में कमजोरी आने का पता चलता है। यह इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि इससे अर्थव्यवस्था में हो रहे सुधार की गति धीमी होने का संकेत मिलता है। हालांकि स्थिति को बहुत खराब नहीं माना जा सकता, क्योंकि अगस्त का सूचकांक 2013 के 12 महीनों के दौरान दर्ज किए गए स्कोर से ऊपर है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि उपभोक्ताओं के भरोसे को जांचने के लिए देश के 18 शहरों में 4,000 लोगों पर सर्वे किया गया। इसमें केवल 7 शहरों में कंज्यूमर कांफिडेंस में जुलाई की तुलना में मजबूती देखने को मिली। सुधार दिखने वाले प्रमुख शहरों में मंगलोर, हैदराबाद, दिल्ली, इंदौर और मुंबई शामिल हैं।