दुनिया के उभरते रीयल एस्टेट बाजारों में भारत को 20वां स्थान मिला है। ग्लोबल प्रॉपर्टी कंसल्टेंट फर्म कुशमैन एंड वेकफील्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार 2012 में भारत में रीयल्टी कारोबार का बाजार करीब 3.4 अरब डॉलर का रहा।
बाजार के आकार के लिहाज से चीन 304.1 अरब डॉलर के साथ पहले नंबर पर रहा, अमेरिका 267.1 डॉलर के साथ दूसरे और यूनाइटेड किंगडम 56.3 अरब डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बीते वर्ष दुनिया में प्रॉपर्टी बाजार छह फीसदी की दर से बढ़कर 929 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया और 2013 तक इसके 1,000 डॉलर तक पहुंच जाने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के मुताबिक 2012 में भारत में रीयल एस्टेट में करीब 19 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इसमें से करीब 67 फीसदी निवेश संस्थागत बिक्री के तहत हुआ जबकि बाकी का 33 फीसदी व्यक्तिगत स्तर पर किया गया।
संस्थागत निवेश में 37 फीसदी की गिरावट रही, जबकि निजी निवेश में 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कॉमर्शियल प्रॉपर्टी में बीते वर्ष 12,800 रुपये का संस्थागत निवेश हुआ, जबकि इस वर्ग में निजी निवेश 6,200 करोड़ रुपये का रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक निजी स्तर पर रीयल एस्टेट में निवेश के मामले में बंगलूरू 3,250 करोड़ रुपये के निवेश के साथ देश में अव्वल रहा। यह 2011 के मुकाबले तकरीबन दोगुना रहा। इसके बाद मुंबई का स्थान रहा, जहां 1,300 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) 700 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कार्यालय के रूप में इस्तेमाल के लिए तैयार हो चुकी प्रॉपर्टी में निवेश में इजाफा हुआ है। इसकी वजह ऐसी प्रापर्टी खरीदने में कम जोखिम होना और लोगों के पास तैयार प्रॉपर्टी की खरीद के लिए पर्याप्त नकदी उपलब्ध होना बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंची कीमत वाले प्रॉपर्टी सौदों में बढ़ोतरी के साथ भारत में प्रापर्टी का बाजार परिपक्वता की ओर बढ़ रहा है।