बढ़ती युवा आबादी और सूचना प्रौद्योगिकी के तेजी से हो रहे विस्तार को देखते हुए भारत में ज्ञान आधारित एक प्रमुख अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता है। हालांकि इस क्षेत्र में उसे कुछ बाधाओं को दूर करना होगा। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही है।
एडीबी ने अपनी रिपोर्ट ‘इनोवेटिव एशिया : एडवांसिंग द नॉलेज बेस्ड इकोनॉमी’ में कहा कि भारत की युवा आबादी और सूचना एवं संचार तकनीक का प्रसार उसकी ताकत है। इसकी बदौलत भारत में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता है। बशर्ते, उसे नियामकीय, शिक्षा और बुनियादी ढांचागत संबंधी कुछ बाधाओं को दूर करना होगा।
रिपोर्ट का कहना है कि गरीबों के प्रति समर्पित तकनीक, आईसीटी में बढ़ता निवेश, ऑडियो-विजुअल सेवाओं में अनुकूल स्थितियां एनिमेशन और कौशल आधारित इंडस्ट्री के लिए एक आउटसोर्सिंग हब है। भारत के लिए यह कुछ आशाजनक परिस्थितियां हैं।
एडीबी के वाइस प्रेसिडेंट (नॉलेज मैनेजमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट) बिंदु एन. लोहानी का कहना है कि आईसीटी सेवाओं और श्रम पूंजी की ताकत के बल पर भारत एक बड़ी ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बन सकता है। हालांकि, भारत को इसके लिए लचीले नियम-कायदे, इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, व्यापार व निवेश संबंधी बाधाएं मिटाना, श्रम बल का कौशल विकास, आरएंडडी पर अधिक व्यय और छोटे कारोबार और इंटरप्राइजेज के लिए आकर्षक वित्तीय सुविधा जैसे कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे।
ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्थाएं आईसीटी, इनोवेशन एवं रिसर्च और उच्च शिक्षा एवं विशेष कौशल का इस्तेमाल विकास के लिए प्रसार और जानकारी प्रभावी बनाने के लिए करती हैं। वर्तमान में विश्व बैंक के नॉलेज इकोनॉमी इंडेक्स में विकासशील एशिया की रेंक ओईसीडी के औसत से नीचे है।
एडीबी का कहना है कि जापान, कोरिया, सिंगापुर, ताइपेई और चीन जैसी विकसित एशियाई अर्थव्यवस्थाओं ने अपने को सफलतापूर्वक कृषि से मैन्यूफैक्चरिंग और फिर उससे ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में हस्तांतरित किया है।