महंगाई और औद्योगिक उत्पादन के मोर्चे पर केंद्र सरकार को झटका लगा है। जुलाई में खुदरा महंगाई 7.46 फीसदी से बढ़कर 7.96 फीसदी तक पहुंच गई है। जबकि जून में औद्योगिक उत्पादन में सिर्फ 3.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। मई में औद्योगिक उत्पादन 5 फीसदी बढ़ा था। खाने-पीने की चीजों की महंगाई 8.05 फीसदी से बढ़कर 9.36 फीसदी तक पहुंच गई है।
जुलाई के दौरान फल-सब्जियों की महंगाई का असर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर पड़ा है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, महीने दर महीने आधार पर जुलाई में खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर 7.970 फीसदी से बढ़कर 9.36 फीसदी तक पहुंच गई है। शहरी इलाकों की खुदरा महंगाई दर 6.82 फीसदी से बढ़कर 7.42 फीसदी हो गई है। ग्रामीण इलाकों में महंगाई की मार और भी ज्यादा है। यहां खुदरा महंगाई 7.87 फीसदी से बढ़कर 8.45 फीसदी तक पहुंच चुकी है।
दोगुनी बढ़ी सब्जियों की महंगाई
महंगाई रसोई का बजट बिगाड़ रही है। खुद सरकार के आंकड़े बताते हैं कि जुलाई में सब्जियों की महंगाई 8.73 फीसदी से बढ़कर 16.88 फीसदी तक पहुंच गई है। अनाज व इसके उत्पादों पर 7.45 फीसदी महंगाई है जबकि दूध व इसके उत्पाद भी करीब 11 फीसदी महंगे हैं। करीब 22 फीसदी महंगाई के साथ फल आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। चीनी को छोड़कर उपभोक्ता की जरूरत की सभी वस्तुएं महंगी हुई हैं।
23 फीसदी गिरा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का उत्पादन
मई में औद्योगिक उत्पादन में सुधार की उम्मीदों के बाद जून में औद्योगिक उत्पादन सिर्फ 3.4 फीसदी बढ़ा है। इस साल अप्रैल से जून के दौरान औद्योगिक उत्पादन में सिर्फ 3.9 की वृद्धि हुई है। हालांकि, पिछले साल की अपेक्षा इस साल औद्योगिक उत्पादन की स्थिति कुछ बेहतर है। पिछले साल की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन एक फीसदी गिरा था। इस साल जून में बिजली उत्पादन 15.7 फीसदी बढ़ा है, जबकि खनन में 4.3 फीसदी की ग्रोथ है। सिर्फ 8 फीसदी ग्रोथ के साथ मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हालत भी खस्ता है। सबसे बुरी हालत कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की है, इस क्षेत्र का उत्पादन 23 फीसदी गिरा है। इसी तरह कंज्यूमर गुड्स का उत्पादन भी 10 फीसदी गिरा है।