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होम-कार लोन नहीं होगा सस्ता, जानिए क्या है वजह?

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महंगाई दर हाल के महीनों में भले ही उम्मीद से अधिक तेजी से नीचे आई है, फिर भी अभी रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं है। रिसर्च फर्म क्रिसिल ने अपनी एक रिपोर्ट के हवाले से यह अनुमान जताया है।
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क्रिसिल की रिसर्च रिपोर्ट का कहना है कि रिजर्व बैंक अभी आगे महंगाई की चाल पर नजर रखेगा और मंगलवार की समीक्षा में प्रमुख दरों को अपरिवर्तित बनाए रख सकता है।

खुदरा महंगाई बीते तीन महीने में काफी तेजी से नीचे आई है। नवंबर 2013 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 11.2 फीसदी थी, फरवरी 2014 में यह घटकर 8.1 फीसदी पर आ गई।
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क्यों नहीं होगा सस्ता, दो वजहें?

रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखने की दो प्रमुख वजहें हैं। पहली, खुदरा महंगाई दर में आई गिरावट मुख्य रूप से सब्जियों की कीमतें नीचे आने के चलते है।

कोर खुदरा महंगाई दर में काफी कम नरमी देखने को मिली है। बीते तीन माह के दौरान कुल खुदरा महंगाई में जहां 3.1 फीसदी की गिरावट आई है, वहीं कोर खुदरा महंगाई महज 0.1 फीसदी घटी है और अभी भी यह करीब 8 फीसदी के स्तर पर बनी हुई है।

ऐसे में रिजर्व बैंक दरों में कटौती का फैसला करने से पहले अभी आने वाले कुछ महीनों तक महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर सकता है। दूसरे, खाद्य महंगाई में तेजी के लिए आपूर्ति संबंधी बाधाएं एक प्रमुख कारक रही हैं।

बीते सात साल में प्रत्येक साल यह दिक्कतें झेलनी पड़ी हैं। हालांकि, एक साल के सूखे के बाद मानसून काफी हद तक सामान्य रहा है। ऐसे में सब्जियों के दाम स्थिर रह सकते हैं लेकिन अन्य खाद्य पदार्थों में तेजी बने रहने की उम्मीद है।
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तेल कीमतों में तेजी की आंशका

हालांकि यदि इस साल मानसून सामान्य और सप्लाई साइड दबाव कम रहता है, तो तुलनात्मक रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतें नीचे रह सकती हैं। इसके अलावा, अल नीनो का जोखिम मानसून को प्रभावित कर सकता है और यूक्रेन संकट के चलते तेल कीमतों में तेजी आने की आशंका है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक की उर्जित पटेल समिति ने उपभोक्ता महंगाई को इस साल के अंत में आठ फीसदी के करीब रहने का लक्ष्य दिया था। जो कि फरवरी में लक्ष्य के करीब 8.1 फीसदी थी। इसके बावजूद जून-जुलाई में मानसून आदि की स्थिति का आकलन करने के बाद ही रिजर्व बैंक ब्याज दरों के स्तर में कोई बदलाव करेगा, जो कि अप्रैल की नीति में करना संभव नहीं है। ऐसे में महंगाई कम होने के बावजूद सस्ते कर्ज की सौगात के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।
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