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आमदनी बढ़ानी है तो बढ़ाएं रेल किराया

Sun, 24 Feb 2013 08:31 PM IST
नई दिल्ली/आरके सिंह (रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन)
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रेलवे की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। उसे अपनी आमदनी बढ़ाने लिए बजट में एक बार फिर किराए में वृद्धि करनी चाहिए। कुछ समय पहले रेलवे ने जो किराया बढ़ाया था उसका एक बड़ा हिस्सा डीजल की कीमतों में वृद्धि के रूप में चला जाएगा।
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वैसे भी पिछले दस सालों से किराए में वृद्धि नहीं किए जाने के कारण यात्री गाड़ियों को चलाने में रेलवे को 20,000 करोड़ की सालाना सब्सिडी देनी पड़ रही है। रेलवे को यात्री किराए से कुल 32,000 करोड़ रुपये की आमदनी होती है, जबकि इसे चलाने में 52,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यह स्थिति ठीक नहीं है।

जहां तक माल भाड़े में वृद्धि की बात है तो मैं इसके पक्ष में नहीं हूं। सभी जानते हैं कि भाड़े से होने वाली आमदनी ही रेलवे को ब्रेड एवं बटर दिलाती है। यात्री किराए के विपरीत पूर्व में सभी रेल मंत्री माल भाड़े की दरों में लगातार वृद्धि करते आए हैं।
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यदि आगे भी यह क्रम जारी रहा तो फ्रेट वाल्यूम घटेगा। लोग रेलवे से दूरी बना लेंगे तथा रोड ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता देंगे। रेलवे की हालत सुधारने के लिए आमदनी में वृद्धि के साथ खर्चों में कटौती तथा निवेश की प्राथमिकताओं को भी बदलना होगा। रेलवे को अब नए प्रोजेक्ट की घोषणा से बचना चाहिए।

सामाजिक दायित्वों को पूरा करने के लिए नई रेल लाइनों के निर्माण भी इस समय ठीक नहीं। इसके स्थान पर जरूरी योजनाओं पर निवेश बढ़ाना चाहिए। आज व्यस्त रूटों पर क्षमता से अधिक ट्रेनें चलाई जा रही हैं। यह रेलवे की संरक्षा तथा यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं है। ऐसे रूटों पर अतिरिक्त ट्रैक का निर्माण, लाइनों के दोहरीकरण पर जोर देना होगा।

रेलवे को अब नई पैसेंजर ट्रेनों को चलाने की घोषणा नहीं करनी चाहिए। पहले यह जरूरी है कि जो ट्रेनें चल रही हैं वे नियमित रूप से चलाई जा सकें। उनकी सुरक्षा एवं संरक्षा सुनिश्चित हो। हमें ट्रेनों की सफाई पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

किराया बढ़ने के बाद ज्यादा सुविधाओं की मांग करने वाले यात्रियों को ध्यान देना होगा कि अभी भी यात्री गाड़ियों को चलाने के लिए माल भाड़े की आमदनी से 20,000 करोड़ अनुदान लेना पड़ता है। इसके साथ ही रेलवे को बिना संरक्षा एवं सुरक्षा से समझौता किए कर्मचारियों के खर्च में भी कटौती के उपाय ढूंढने होंगे। रेलवे की कमाई का 50 फीसदी से ज्यादा इसी मद में खर्च हो रहा है।
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