देश में पोंजी स्कीम के जरिए ऊंचे रिटर्न देने का लालच देने वालों के लिए आगे की राह कठिन हो सकती है। सरकार के स्तर पर जहां इस तरह की स्कीम लाने वालों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान हो सकता है।
वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) जैसे नियामकों के अधिकारों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
इसके पीछे सरकार की कोशिश है कि शारदा समूह जैसे मामलों के जरिए आम लोगों की गाढ़ी कमाई पर कंपनियां इस तरह की स्कीम लाकर चपत न लगा सकें।
पश्चिम बंगाल के शारदा समूह का मामला सामने आने के बाद सरकार ने हाल ही में अंतर मंत्रालयीय समूह (आईएमजी) का गठन किया है, जिसकी पहली बैठक में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि मौटे तौर पर सभी सदस्यों में इस बात पर सहमति है कि ज्यादा सख्त कार्रवाई करने से ही ऐसी स्कीम पर लगाम लगाई जा सकती है।
इसके लिए स्कीम चलाने वाली कंपनियों के कर्ताधर्ताओं पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान करने पर भी सहमति बनी है। अधिकारी के अनुसार साथ ही यह भी माना गया है कि पोंजी स्कीम से आम लोगों को खास तौर से सतर्क करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को भी आगे आने होगा, जिससे कि लोग इस तरह की स्कीम में निवेश न करें।
आईएमजी ने इसके अलावा आरबीआई और सेबी को ज्यादा अधिकारी देने के लिए एक मसौदा पेश करने को कहा है, जिससे कि नियामक ऐसी स्कीम पर जल्द और सख्त कार्रवाई कर सकें। इसके पहले संसद की वित्तीय मामलों की स्थायी समिति ने भी आरबीआई से इस पूरे मामले पर एक हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है।
इसके तहत भी आरबीआई अपने अधिकार बढ़ाने के संबंध में प्रस्ताव पेश करेगा। समिति इसके अलावा 31 मई को सेबी प्रमुख से भी इस मामले पर बातचीत करेगा। आईएमजी में वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कॉरपोरेट अफेयर्स मामलों के मंत्रालय, सेबी और आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।