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बीमा, पेंशन, कमोडिटी के लिए एक नियामक

Fri, 22 Mar 2013 11:03 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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वित्तीय क्षेत्र के लिए केवल दो नियामक बनाने की तैयारी है। नए ढांचे में बीमा, पेंशन और कमोडिटी आदि के लिए मौजूदा नियामकों की जगह सभी के लिए एक नियामक होगा, जो कि सुपर रेगुलेटर की तरह काम करेगा।
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वहीं दूसरे नियामक के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक होगा, जो कि बैंकिंग सेवाओं, मौद्रिक नीति और भुगतान आदि के लिए मौजूदा स्वरूप में ही काम करेगा। सरकार द्वारा गठित फाइनेंशियल सेक्टर लेजिसलेटिव रिफार्म कमीशन ने यह प्रमुख सिफारिशें अपनी रिपोर्ट में दी हैं।

शुक्रवार को वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को कमीशन के अध्यक्ष न्यायाधीश बीएन श्रीकृष्णा ने अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार बीमा क्षेत्र के लिए बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा), भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) और फारवर्ड मार्केट कमीशन (एफएमसी) आदि का काम करीब एक ही जैसा है। ऐसे में इन सभी नियामकों को सम्मिलित कर इन सबके लिए नियामक बनाना चाहिए, जो कि यूनिफाइड फाइनेंशियल एजेंसी के रूप में होगी।
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कमीशन ने इसके अलावा अपनी सिफारिशों में कहा है कि विदेशी मुद्रा के प्रवाह पर नजर रखने के लिए कई सारी एजेंसियां है। जैसे कि डीआईपीपी विभाग एफडीआई नीति बनाता है, जबकि एफडीआई प्रस्तावों को मंजूरी एफआईपीबी द्वारा दी जाती है।

इसके बाद उन प्रस्तावों को सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और आरबीआई के पास भी मंजूरी के लिए भी गुजरना पड़ता है। रिपोर्ट इस बहुस्तरीय मंजूरी प्रक्रिया को भी कम करने की सिफारिश करती है। रिपोर्ट में इसके अलावा सरकारी खर्च के लिए स्रोत बढ़ाने पर एक डेट मैनेजमेंट ऑफिस बनाने की भी सिफारिश की गई है। कमीशन ने इसके पहले अक्तूबर 2012 में अप्रोच जारी किया था।

रिपोर्ट पर वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि वह जल्द से जल्द इस बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जानकारी देंगे, जिसके बाद अगले तीन से चार दिन में रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी जाएगी।

आसान नहीं डगर
श्रीकृष्णा रिपोर्ट की सिफारिशों को अमल में लाने की डगर आसान नहीं है। यदि वित्तीय क्षेत्र में बीमा, पेंशन, कमोडिटी आदि के लिए एक सुपर रेगुलेटर सरकार बनाना चाहती है, तो उसे 20-25 कानूनी संशोधन करने होंगे। मौजूदा राजनीतिक अनिश्चितता के माहौल में ऐसा करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

ग्राहकों की शिकायत के लिए रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि कंपनियों के खिलाफ ग्राहकों की शिकायत के लिए एक एजेंसी बनाई जाए, जो कि फाइनेंशियल रिड्रेसल एजेंसी के रूप में होगी।
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