देश के विकास दर की रफ्तार पिछले एक दशक के न्यूनतम स्तर पर दर्ज होने की आशंका है। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष 2012-13 में सकल घरेलू विकास दर (जीडीपी) 5 फीसदी रहने का अनुमान है। जबकि, 2011-12 में यह 6.2 फीसदी पर दर्ज की गई थी। जीडीपी में गिरावट के पीछे प्रमुख कारण मैन्यूफैक्चरिंग, कृषि और सेवा क्षेत्र का कमजोर प्रदर्शन रहा है।
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) की ओर से जारी मौजूदा वित्तीय वर्ष के अग्रिम अनुमान के मुताबिक कृषि विकास दर 1.8 फीसदी रहने का अनुमान है। जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह 3.6 फीसदी दर्ज की गई थी। मैन्यूफैक्चरिंग विकास दर 2.7 फीसदी से घटकर 1.9 फीसदी और सेवा क्षेत्र के लिए 11.7 फीसदी से कम होकर 8.6 फीसदी विकास दर रहने की पूर्वानुमान है।
सीएसओ के आंकड़े सरकार और आरबीआई के अनुमान से काफी कम है। सरकार ने बजट में 7.6 फीसदी विकास दर रहने का अनुमान लगाया था। बाद में इसे संशोधित कर 5.7 फीसदी कर दिया। इसी तरह, आरबीआई ने जीडीपी का अनुमान घटाकर 5.5 फीसदी कर दिया है। पिछले दिनों सरकार ने 2011-12 के जीडीपी आंकड़ों में संशोधन कर 6.5 फीसदी से घटाकर 6.2 फीसदी कर दिया है। इसमें संशोधन नहीं किया जाता, तो चालू वित्त वर्ष का पहला अग्रिम अनुमान 5 फीसदी से भी कम हो सकता था।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद् के चेयरमैन सी. रंगराजन ने भी सीएसओ के आंकड़ों पर निराशा व्यक्त किया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जीडीपी के आंकड़ों में भविष्य में सुधार नजर आएगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2002-03 में जीडीपी 4 फीसदी थी। जबकि पिछले दस साल में विकास दर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वर्ष 2006-07 में 9.6 फीसदी के साथ दर्ज किया गया था।
वित्त वर्ष 2012-13 में जीडीपी का अनुमान
एजेंसी जीडीपी अनुमान कब हुआ जारी
सीएसओ 5.0 फरवरी, 2013
मूडीज 5.4 नवंबर, 2012
आईएमएफ 4.9 अक्तूबर, 2012
एडीबी 5.6 अक्तूबर, 2012
फिच 6.0 सितंबर, 2012
स्टैंडर्ड एंड पूअर्स5.5 सितंबर, 2012
मॉर्गन स्टेनले 5.1 सितंबर, 2012
मूडीज 6.0 अगस्त, 2012
क्रिसिल 5.5 अगस्त, 2012
आरबीआई 6.5 जुलाई, 2012
सरकारी अनुमान 7.3 अप्रैल, 2012
(आंकड़े प्रतिशत में)