प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिलचस्पी जाहिर करने के बाद गेल इंडिया लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश में जगदीशपुर से फूलपुर होते हुए पश्चिम बंगाल के हल्दिया को जोड़ने वाली गैस पाइपलाइन पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है।
इस पाइपलाइन के लिए एक बार फिर से सर्वेक्षण कार्य शुरू हो चुका है और सब कुछ यदि योजनाबद्ध ढंग से हुआ तो अगले साल तक इसका निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा। इसके तहत 2,050 किलोमीटर पाइपलाइन का निर्माण प्रस्तावित है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पद संभालते ही पूर्वी राज्यों पर विशेष ध्यान देने का संकेत दिया था और इस इलाके में चल रही परियोजनाओं की विशेष समीक्षा की थी।
समीक्षा बैठक में गेल की इस पाइपलाइन परियोजना का मसला उठा। हालांकि इसे करीब छह साल पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और इसके लिए एक बार सर्वेक्षण भी हो चुका है, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहंी हो पाया है।
वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक गेल से इस काम के बारे में पूछा गया तो तो उसने एंकर सपोर्ट की बात की। गेल की शर्त थी कि यदि गोरखपुर और बरौनी के उर्वरक कारखानों की तरफ से गैस आपूर्ति की गारंटी मिले तो नए सिरे से सर्वेक्षण कार्य शुरू हो सकता है।
इसके बाद मामला रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय तक पहुंचा। बताया जाता है कि वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही गेल ने पाइपलाइन के लिए फिर से सर्वेक्षण का काम शुरू किया।
गेल के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सर्वेक्षण का कार्य काफी आगे बढ़ गया है और उम्मीद है कि अगले वर्ष के मध्य तक यह पूरा हो जाएगा। उनके मुताबिक यदि योजनाबद्ध ढंग से सब कुछ हुआ तो अगले साल पाइपलाइन का निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा।
इस पाइपलाइन से उत्तर प्रदेश के वाराणसी, इलाहाबाद, जौनपुर और गोरखपुर शहर जुड़ेंगे। इनमें प्रधानमंत्री का लोकसभा क्षेत्र भी है और यदि पाइपलाइन बनी तो वहां पीएनजी और सीएनजी सप्लाई का मार्ग प्रशस्त होगा।
इसी तरह इससे बिहार के गया, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, पटना, छपरा, सिवान, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, बेगूसराय, भागलपुर, सारण और पश्चिम चंपारण जिलों को भी लाभ होगा। यही वजह है कि इसे 2015 के अक्तूबर-नवंबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से भी जोड़ कर देखा जा रहा है।