ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने चालू वित्त वर्ष (2014-15) में भारत की आर्थिक विकास दर 5.6 फीसदी से बढ़कर 5.7 फीसदी पर पहुंचने का अनुमान जताया है। एजेंसी ने नरेंद्र मोदी सरकार के पहले आम बजट में आर्थिक सुधारों की दिशा में उठाए गए कदमों से विकास दर में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है।
फिच की रिपोर्ट के मुताबिक आम बजट में विनिर्माण (मैन्यूफेक्चरिंग), बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर), बचत और आवासीय क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार की तरफ से किए गए उपायों से वित्त वर्ष 2014-15 में विकास दर 5.7 फीसदी पर पहुंच सकती है।
हालांकि मानसून के कमजोर रहने का कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। साथ ही आर्थिक विकास दर में तेजी लाने के लिए सरकार की ओर से महंगाई नियंत्रित करने के भी उपाय किए जाने की जरूरत भी फिच ने जताई है।
फिच ने कृषि क्षेत्र की विकास दर का अनुमान पहले के 3 फीसदी से घटाकर 1.3 फीसदी कर दिया है, जबकि पिछले वर्ष यह 4.7 फीसदी रहा था। उसके अनुसार मानसून के आगमन में विलंब और उसके कमजोर रहने से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। 1 अगस्त तक देश में सात करोड़ 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की बुवाई हुई है, जबकि गत वर्ष यह सात करोड़ 98 लाख हेक्टेयर रही थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर पहले के 4.1 फीसदी के अनुमान से बढ़कर 5.1 फीसदी पर पहुंचने की उम्मीद है। अप्रैल-मई में देश के औद्योगिक उत्पादन इंडेक्स में चार फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में थोक मूल्य आधारित महंगाई भी 5.5 फीसदी से घटकर 5.4 फीसदी पर आने का अनुमान व्यक्त किया गया है। इसी तरह खुदरा महंगाई भी आठ फीसदी से कम होकर 7.9 फीसदी पर रहने की उम्मीद जताई गई है। साथ ही कहा गया है कि राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.1 फीसदी के बजट अनुमान से बढ़कर 4.3 फीसदी पर पहुंच सकता है।
इससे पहले विश्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष में विकास दर 5.5 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया था, जबकि नोमूरा ने पांच फीसदी विकास दर का अनुमान जताया था। गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष (2013-14) में देश की आर्थिक विकास दर 4.7 फीसदी रही थी।