एक अप्रैल से नेशनल हाईवे पर सफर करना महंगा हो जाएगा। थोक महंगाई में बढ़ोतरी के आधार पर इस पर सफर करने वालों को अब ज्यादा टोल टैक्स देना पड़ेगा।
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नेशनल हाईवे फी रूल्स, 2008 के तहत हर साल 1 अप्रैल से राष्ट्रीय राजमार्गों की टोल दरें बढ़ाई जाती हैं। इसके लिए एक फार्मूला तय किया गया है, जो थोक महंगाई दर पर आधारित है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि हाईवे की लंबाई और वाहनों के हिसाब से टोल दरों में औसतन 5-6 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञ एसपी सिंह का कहना है कि टोल वसूली का सीधे असर माल भाड़े और ढुलाई खर्च पर पड़ेगा।
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थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का बढ़ेगा प्रीमियम
कार, दोपहिया, तिपहिया वाहन, ट्रैक्टर आदि सभी तरह की गाड़ियों पर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम 20 फीसदी तक महंगा हो रहा है।
बीमा नियामक इरडा ने मोटर बीमा कंपनियों को 1 अप्रैल से प्रीमियम बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। देश में सभी वाहन मालिकों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराना अनिवार्य है। इसके जरिये ही दुर्घटना के दौरान क्लेम का सेटलमेंट किया जाता है।
बैंकिंग सेवाएं पड़ेंगी जेब पर भारी
निजी क्षेत्र के कुछ बैंक सेवा शुल्क में बढ़ोतरी कर रहे हैं। धनलक्ष्मी बैंक ग्राहकों को एसएमएस के जरिये भेजी जाने वाली जानकारियों और सूचनाओं के लिए शुल्क में इजाफा कर रहा है।
बैंक अब 50 पैसे प्रति एसएमएस अलर्ट शुल्क लेगा। इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक एसबीआई बचत खाते पर मुफ्त ट्रांजैक्शन की संख्या में कमी कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव के तहत ट्रांजेक्शन की संख्या तय करने में एटीएम से किए गए ट्रांजैक्शन आदि को भी शामिल किया जा सकता है। इस संबंध में प्रस्ताव की मंजूरी का इंतजार है। इसके बाद बैंक इसकी विस्तृत घोषणा कर सकता है।
गैस कीमत के मामले में अभी राहत
चुनाव आयोग केहस्तक्षेप केचलते प्राकृतिक गैस की दरें बढ़ने का मामला चुनाव पूरा होने तक टल गया है। केंद्र सरकार ने 1अप्रैल से गैस के दाम दोगुने करने की तैयारी कर ली थी, लेकिन चुनाव आयोग के हस्तक्षेप के चलते मामला कुछ समय के लिए टल गया है।
1 अप्रैल से 57 साल पुराने कंपनी कानून की जगह नया कंपनी कानून लागू हो जाएगा। इस कानून के कई प्रावधान 1 अप्रैल से लागू हो रहे हैं। नए कानून के जरिये जहां कंपनियों के फैसलों में पारदर्शिता बढ़ेगी, वहीं कंपनियों के बोर्ड में महिलाओं की भागीदारी में भी इजाफा होगा।
अप्रैल से केबल टीवी देखना महंगा हो सकता है। टेलीकॉम नियामक ट्राई ने नॉन एड्रेसेबल केबल टीवी सिस्टम के लिए टैरिफ में 27.5 फीसदी तक बढ़ोतरी की मंजूरी दी है। हालांकि राहत की बात यह है कि 27.5 फीसदी बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर एक साथ नहीं पड़ेगा।
ट्राई के अनुसार टैरिफ रेट में अधिकतम 15 फीसदी की बढ़ोतरी एक अप्रैल 2014 से की जा सकेगी। जबकि बाकी 12.5 फीसदी की राशि एक जनवरी 2015 से बढ़ाई जाएगी।
सोमवार को ट्राई की ओर से जारी किए गए निर्देश के अनुसार महंगाई में बढ़ोतरी को देखते हुए टैरिफ सीलिंग में बढ़ोतरी की गई है। नियामक के अनुसार पिछले पांच साल में टैरिफ में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई थी। ऐसा इसलिए था, क्योंकि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा था।
ट्राई का टैरिफ बढ़ाने में जारी निर्देश थोक और रिटेल दोनों स्तर पर लागू होगा। ट्राई के अनुसार टैरिफ दरों का निर्धारण थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर तय किया गया है।
ट्राई के यह निर्देश टेलीकम्युनिकेशंस सर्विसेज टैरिफ आर्डर 2014 के तहत दिए गए हैं। साल 2004 से टैरिफ निर्धारित करने की नई प्रणाली के तहत चौथी बार दरों को बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत 2005 में सात फीसदी, 2006 में चार फीसदी और 2009 में छह फीसदी की बढ़ोतरी मंजूर की गई थी।