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पाम की खेती पर दोबारा होगी जोर आजमाइश

Sat, 24 Nov 2012 11:09 PM IST
विजय गुप्ता/नई दिल्ली
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पाम के जरिए खाद्य तेल की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार फिर से पहल करने जा रही है। इसके तहत वैज्ञानिकों की देखरेख में किसानों को पाम की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
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कृषि वैज्ञानिकों ने पाम की खेती के लिए 18 राज्यों में 19.30 करोड़ हेक्टेयर भूमि की पहचान कर ली है। इसमें ज्यादातर राज्य दक्षिण और पूर्वी भारत के हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि पाम की खेती के लिए उपयुक्त पर्यावरण और पानी की प्रचुरता वाले क्षेत्रों का चयन किया गया है। सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में पाम की खेती में तीन लाख हेक्टेयर भूमि का इजाफा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के उप महानिदेशक (बागवानी) डॉ के. किशन कुमार ने बताया कि खाद्य तेल की मांग और उपलब्धता के बीच के अंतर को पाम ऑयल के जरिए पूरा किया जा सकता है। मौजूदा समय में जरूरत की लगभग 70 फीसदी पूर्ति आयातित पाम आयल के जरिए हो रही है। घरेलू स्तर पर पाम की खेती को बढ़ावा देने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।
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इसलिए कृषि मंत्रालय ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत हर वर्ष पाम की खेती में 60,000 हेक्टेयर भूमि का इजाफा करने का लक्ष्य रखा है। मौजूदा समय देश में लगभग दो लाख हेक्टेयर भूमि पर पाम की खेती की जा रही है, जिसका सर्वाधिक हिस्सा आंध्र प्रदेश में है। उन्होंने बताया कि पाम के लिए उपयुक्त भूमि का पता लगाने के लिए सरकार ने नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर ऑयल पाम के पूर्व निदेशक आर. रत्नम की अगुवाई में एक समिति बनायी थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में 18 राज्यों में 19.3 करोड़ हेक्टेयर भूमि की पहचान की है।
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