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खत्म हो सकती है निर्यातकों की छूट

Wed, 21 Jan 2015 09:13 AM IST
राजीव कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
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वित्तीय घाटे पर लगाम के लिए सरकार निर्यातकों को मिलने वाली विभिन्न प्रकार की आर्थिक छूट समाप्त कर सकती है।
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ब्याज दरों छूट की अवधि को नहीं बढ़ाकर सरकार ने निर्यातकों को इस बात का संकेत दे दिया है। आगामी बजट के बाद नई विदेश व्यापार नीति में सरकार अपनी नीति स्पष्ट कर देगी।

निर्यातकों को चैप्टर तीन के तहत सरकार की तरफ से ड्यूटी ड्रा-बैक, फोकस मार्केट स्कीम, मार्केट लिंक्ड फोकस प्रोडक्ट, फोकस प्रोडक्ट स्कीम के तहत आर्थिक लाभ दिए जाते हैं। इसके अलावा निर्यात बाजार विकसित करने के नाम पर भी सरकार की तरफ से निर्यातकों को आर्थिक सहायता मिलती है।
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मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक सरकार अपने वित्तीय घाटे को कम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब पहले से जारी किसी भी प्रकार की आर्थिक छूट या कर लाभ को सरकार ढ़ोने के पक्ष में नहीं है।

मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक निर्यातकों के साथ हुई बैठक में उन्हें यह इशारा कर दिया गया है कि वे बिना इंसेंटिव के भी काम करने की आदत डाले। इसकी भरपाई के लिए सरकार निर्यातकों की ट्रांजेक्शन लागत को कम करने व ब्याज दरों को कम करके उनकी पूर्ण लागत को कम करने के लिए प्रयासरत है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार निर्यातकों को थोड़ा बहुत जो आर्थिक लाभ देगी वह उत्पादन लिंक्ड होगा। इनमें अनुसंधान व विकास के साथ कुशलता कार्यक्रम शामिल हो सकता है।

पिछले साल 31 मार्च तक रोजगारपरक व एसएमई क्षेत्र के निर्यातकों को ब्याज दरों में तीन फीसदी तक की छूट मिल रही थी, लेकिन उस छूट को सरकार ने जारी रखने से इनकार कर दिया।
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सूत्रों का कहना है कि निर्यातकों के आर्थिक लाभ को सरकार जारी रखने के मूड में होती तो निश्चित रूप से ब्याज दरों की इस छूट को जारी रखा जाता।

मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक निर्यात के कई ऐसे क्षेत्र भी है जिन्होंने वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मानक को हासिल कर लिया है। ऐसे में उन क्षेत्रों को किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं देने के लिए विश्व व्यापार संगठन की तरफ से भी काफी दबाव है।
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