देश की वित्तीय स्थिति पटरी पर आ जाने के बाद सरकार सोने के आयात पर लगाई गई पाबंदियों में ढील देने के बारे में विचार कर सकती है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि अभी ऐसी स्थिति नहीं है, पर यदि हालात में सुधार हुआ, तो सरकार की नीतियां लचीली हैं। सरकार की नीतियां पत्थर पर खिंची लकीर की तरह नहीं हैं, जिन्हें बदला न जा सके।
जेटली ने कहा कि वित्तीय घाटे और चालू खाते के घाटे दोनों को लेकर हमें काफी सतर्कता भरा रवैया अपनाना होगा। इसे देखते हुए ही हमें आगे कदम बढ़ाने होंगे।
गौरतलब है कि लगातार बढ़ते चालू खाते के घाटे पर काबू पाने के लिए ही यूपीए सरकार के कार्यकाल में सोने के आयात पर शुल्क को बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया था।
इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई ) की ओर से भी सोने के आयात पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थीं। सरकार व आरबीआई के इन इस दो तरफा कदमों के चलते सोने का आयात करीब 72 फीसदी की गिरावट के साथ 2.19 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया।