अलनीनो प्रभाव अगर इस साल मानसून पर अपना बुरा असर दिखाता है तो यह देश की आर्थिक विकास दर को धीमा कर सकता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने यह चेतावनी देते हुए कहा है कि ऐसे में अगले वित्त वर्ष (2014-15) में विकास दर 6 फीसदी के अनुमान से घटकर 5.2 फीसदी पर सिमट सकती है।
क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले दशक में अलनीनो ने दो साल वर्ष 2002 और 2009 में मानसून को बुरी तरह प्रभावित किया था। अगर इस बार भी ऐसा होता है, तो देश की अर्थव्यवस्था पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
अलनीनो के चलते मानसून कमजोर होने से बारिश की कमी होने पर सीधे तौर पर इसका बुरा असर फसलों पर पड़ेगा। उत्पादन में कमी से खाद्य महंगाई बढ़ सकती है साथ ही इससे देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में भी सुस्ती आ सकती है।
हालांकि अलनीनो को लेकर की जा रही भविष्यवाणियां अभी प्रारंभिक स्तर की ही हैं। ऐसे में इनके आधार पर पुख्ता तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि अलनीनो आवश्यक रूप से मानसून को प्रभावित करेगा ही।
क्रिसिल ने कहा है कि वित्त वर्ष 2014-15 के लिए जताए गए 6 फीसदी विकास दर का अनुमान काफी हद तक कृषि क्षेत्र की विकास दर 3 फीसदी के स्तर पर रहने पर टिका हुआ है।
अलनीनो के चलते अगर कृषि की विकास दर प्रभावित होती है, तो जाहिर तौर पर जीडीपी में कमी आएगी। गौरतलब है कि अलनीनो प्रभाव के चलते प्रशांत महासागर का जल गर्म हो जाने से महासागरीय जलधाराओं और वायु धाराओं में बदलाव आ जाते हैं। यह पृथ्वी के एक बड़े भूभाग के मौसम को प्रभावित करते हैं।