फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये कैसे अच्छे दिन, लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसे नहीं!

विज्ञापन
विज्ञापन
मोदी सरकार के एक साल पूरे हो चुके हैं। ऐसे में उनके कामों को लेकर विपक्ष तो आए दिन हमला करता रहता है, लेकिन नीलसन सर्वे एजेंसी के एक सर्वे ने मोदी के एक साल पर और भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
विज्ञापन


इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के अनुसार कंज्यूमर गुड्स की सेल में पिछले एक दशक में काफी कमी आई है, जिससे यह साफ हो रहा है कि भारतीय अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं। या फिर यूं कहें कि अब लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं, महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है।

लोग खासकर उन चीजों को खरीदने में कम खर्च कर रहे हैं, जो रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत जरूरी नहीं हैं। जैसे ऑटोमोबाइल, लग्जरी गुड्स, होटल और रेस्टोरेंट में खाना आदि।
विज्ञापन


हालांकि बहुत सी कंपनियों के मालिकों का मानना है कि जल्द ही यह स्थिति सुधर सकती है, लेकिन खराब मानसून का भी डर सता रहा है। ऐसा होने पर ग्रामीण इलाकों में होने वाली कंज्यूमर गुड्स की सेल पर काफी असर पडेगा।

नीलसन के डेटा के हिसाब से इस साल कंज्यूमर प्रोडक्ट का पूरा मार्केट 7.5 फीसदी तक सिमट गया है, जबकि पिछले साल यह 10.6 फीसदी था।
विज्ञापन

किस सेग्मेंट में कितनी गिरावट

ये गिरावट शहरी और ग्रामीण दोनों ही बाजारों में आई है। ये गिरावट मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजें, घर, पर्सनल इस्तेमाल की चीजें और बिना प्रिस्क्रिप्शन के बिकने वाली दवाइयां हैं।

एफएमसीजी सेक्टर की सेल्स में ग्रोथ पिछले साल 10.6 प्रतिशत थी, जबकि इस साल यह घटकर 7.5 प्रतिशत हो गई है। फूड सेग्मेंट में ग्रोथ 8.7 प्रतिशत रही है, जबकि पिछले साल यह ग्रोथ 12.4 प्रतिशत थी।

अगर बात की जाए नॉन फूड सेग्मेंट की तो उसमें पिछले साल 8.2 प्रतिशत की ग्रोथ थी, लेकिन इस साल यह सिर्फ 6.1 प्रतिशत रही है। ओटीसी सेग्मेंट का तो और भी बुरा हाल है। इसमें ग्रोथ सिर्फ 6.5 प्रतिशत है, जबकि पिछले साल यह 11.3 प्रतिशत थी। ओटीसी सेग्मेंट में बिना प्रिस्क्रिप्शन के बेची जाने वाली दवाइयां आती हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें