मोदी सरकार के एक साल पूरे हो चुके हैं। ऐसे में उनके कामों को लेकर विपक्ष तो आए दिन हमला करता रहता है, लेकिन नीलसन सर्वे एजेंसी के एक सर्वे ने मोदी के एक साल पर और भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के अनुसार कंज्यूमर गुड्स की सेल में पिछले एक दशक में काफी कमी आई है, जिससे यह साफ हो रहा है कि भारतीय अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं। या फिर यूं कहें कि अब लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं, महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है।
लोग खासकर उन चीजों को खरीदने में कम खर्च कर रहे हैं, जो रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत जरूरी नहीं हैं। जैसे ऑटोमोबाइल, लग्जरी गुड्स, होटल और रेस्टोरेंट में खाना आदि।
हालांकि बहुत सी कंपनियों के मालिकों का मानना है कि जल्द ही यह स्थिति सुधर सकती है, लेकिन खराब मानसून का भी डर सता रहा है। ऐसा होने पर ग्रामीण इलाकों में होने वाली कंज्यूमर गुड्स की सेल पर काफी असर पडेगा।
नीलसन के डेटा के हिसाब से इस साल कंज्यूमर प्रोडक्ट का पूरा मार्केट 7.5 फीसदी तक सिमट गया है, जबकि पिछले साल यह 10.6 फीसदी था।