एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में पारदर्शिता न होने और पहुंच को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय भिड़ गए हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करते हुए लंबे समय से लंबित इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है।
मंत्रालय का कहना है कि इस मसले की वजह से देश में नागरिक उड्डयन के विकास में बाधा आ रही है। प्रधानमंत्री को भेजे एक प्रेजेंटेशन नोट में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने तीन मुद्दों का खास तौर पर उल्लेख किया है। इसके तहत एटीएफ की कीमतों में पारदर्शिता, एटीएफ के परिवहन में खुली पहुंच (ओपेन एक्सेस) और एटीएफ को पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस बोर्ड एक्ट (पीएनजीआरबी) के तहत अधिसूचित उत्पादन बनाए जाने की मांग की गई है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस मसले पर पेट्रोलियम मंत्रालय के रूख से बेहद खफा है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि एटीएफ की आपूर्ति में प्रतिस्पर्धा और पर्याप्त नियंत्रण पहले से है। एटीएफ के नियमन और इसको अधिसूचित उत्पाद की कैटेगरी में रखने के खिलाफ तर्क देते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि एयरलाइंस टेंडर के जरिए फ्यूल सप्लायर्स का चुनाव करती हैं।
इसमें निजी कंपनियां भी शामिल होती हैं। ऐसे में यह पर्याप्त है। हालांकि एटीएफ मार्केट में प्रतिस्पर्धा पहले से मौजूद होने के पेट्रोलियम मंत्रालय के तर्क को नकारते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पेट्रोलियम सचिव को एक आक्रामक नोट लिखा है। इस नोट की एक प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भी भेजी गई है।
नोट में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि पीएसयू ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) के एटीएफ में न सिर्फ समानता है, बल्कि कीमतों के खुलासे के तौर तरीकों में भी पारदर्शिता का अभाव है। नोट में कहा गया है कि एयरलाइंस टेंडर के जरिए अपना फ्यूल सप्लायर्स चुनती हैं, लेकिन तीनों ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की सूचीबद्ध कीमतें विभिन्न एयरपोर्ट्स पर समान हैं।
कीमतों में इस तरह की समरूपता से स्पष्ट है कि तीनों पीएसयू कंपनियों ने एक कार्टेल बना लिया है। इसके अलावा ओएमसी द्वारा दिए जा रहे डिस्काउंट में भी पारदर्शिता नहीं है, क्योंकि कस्टमर एयरलाइंस को मूल्य निर्धारण तंत्र के बारे में जानकारी नहीं है। यह प्रतिस्पर्धी बाजार के मूल सिद्धांत के खिलाफ है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पेट्रोलियम मंत्रालय के उस तर्क का भी जवाब दिया है, जिसमें कहा गया था कि एटीएफ नियंत्रणमुक्त उत्पाद है और इसकी कीमतें आयात समानता के सिद्धांत पर आधारित है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दावा किया है कि एटीएफ के परिवहन में खुली पहुंच नहीं है। इसका कारण 98 फीसदी फैसिलिटीज और पाइपलाइन सहित इंटरमीडिएट स्टोरेज प्वाइंट्स का स्वामित्व और इन पर नियंत्रण तीनों पीएसयू कंपनियों का होना है। पेट्रोलियम मंत्रालय के खुली पहुंच होने के तर्क को नकारते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि तीनों पीएसयू कंपनियां इन फैसिलिटीज और इंफ्रास्ट्रक्चर को साझा करती हैं, ऐसे में एटीएफ बाजार में नई कंपनी के लिए इन फैसिलिटीज का उपयोग करना संभव नहीं है। इससे प्रतिस्पर्धा का अवसर सीमित होता है।
हाल में नई कंपनी द्वारा जरूरी सुविधाओं तक पहुंच न होने की समस्या के बारे में की गई शिकायत नागरिक उड्डयन मंत्रालय के खुली पहुंच न होने के दावे का समर्थन करती है। एटीएफ और इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को नियामक के दायरे में लाने की लंबित अपील के जवाब में नियामक ने हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है।