सरकार 1 जनवरी से सब्सिडी का नकद भुगतान लाभार्थियों को शुरू कर देगी। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बताया कि नए साल के पहले दिन से 15 राज्यों के 51 जिलों में यह योजना शुरू हो जाएगी, जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर करने वाले लोगों के खातों में सब्सिडी राशि सीधे हस्तांतरित कर दी जाएगी।
आधार कार्ड पर आधारित यह योजना 2013 से पूरे देश में शुरू हो जाएगी। वित्त मंत्री ने शनिवार को एक बैंक सम्मेलन के मौके पर कहा कि सरकार चाहती है कि यह काम पूरे देश में अगले वर्ष के अंत तक पूरा कर दिया जाए।
सरकार प्रति वर्ष पेंशन और अन्य सब्सिडी के मदों में कई हजार करोड़ रुपये खर्च करती है। इस राशि का सही वितरण सुनिश्चित हो सके इसलिए सब्सिडी के नकद भुगतान की व्यवस्था की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था के लिए गठित समिति के सदस्यों के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सोमवार को बैठक करेंगे। मालूम हो कि इस साल सरकार पर अनाज, खाद, पेट्रो उत्पादों आदि के मद में कुल मिलाकर करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी का बोझ पड़ने का अनुमान है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने के चलते सब्सिडी पर यह बोझ और भी बढ़ सकता है।
21 करोड़ आधार कार्ड अब तक जारी किए जा चुके हैं
अर्थव्यवस्था सुस्त
अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर चिदंबरम ने कहा कि यह फिलहाल सुस्त है लेकिन आगे इसमें तेजी की पूरी संभावना है। उन्होंने बताया कि विकास दर अभी 5.5 फीसदी पर ही रहने के आसार हैं। उन्होंने कहा कि हमें विकास दर बढ़ाने के रास्ते तलाशने होंगे।
बैंकों का विलय जरूरी
सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों के विलय के प्रस्ताव पर वित्त मंत्री ने कहा कि अगले कुछ वर्षों में भारतीय बैंकों को वैश्विक बैंकिंग प्रणाली में अपना स्थान बनाने के लिए अभी से तैयार होना पडे़गा। इसके लिए इनमें मजबूती आनी जरूरी है। यदि भारत को अगले 15 वर्षों में दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है तो उसके पास वैश्विक स्तर के दो या तीन बडे़ बैंकों का होना बेहद जरूरी है यह विलय प्रक्रिया के जरिए ही संभव है। चीन में ऐसा किया जा चुका है। मालूम हो कि कई छोटे बैंक और मजदूर संगठन सरकार की इस नीति का कड़ा विरोध कर रहे हैं।