रसोई गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी की रकम सीधे ग्राहकों के खाते में पहुंचाने की योजना लागू होने में अभी वक्त लग सकता है।
इनके ग्राहकों के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना (डीबीटी) की शुरुआत 15 अप्रैल से प्रस्तावित है, लेकिन आधार कार्ड योजना की आधी-अधूरी तैयारी और पहले चरण के लिए चिह्नित 20 जिलों में बैंकों की पर्याप्त पहुंच नहीं होने के कारण माना जा रहा है कि सरकार के लिए इसे तय तिथि से लागू कर पाना मुश्किल होगा।
केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को नियत समय पर लागू करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने मौजूदा स्थिति की समीक्षा का निर्णय लिया है। देश के 20 जिलों में 15 अप्रैल से एलपीजी ग्राहकों के लिए डीबीटी को शुरू किए जाने का लक्ष्य रखा गया था।
लेकिन मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि पहले चरण की तैयारी अभी भी अधूरी है। ऐसे में योजना को लागू करना संभव होगा या नहीं यह एक गंभीर प्रश्न बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय इस हफ्ते डीबीटी की तैयारियों को लेकर आंतरिक समीक्षा करेगा। पहले चरण में डीबीटी लक्षित जिलों में लागू होगा पाएगा या नहीं इसके बाद ही मालूम हो पाएगा।
सूत्रों के मुताबिक तेल कंपनियों को यह बताया जा चुका है कि अगर इन जिलों में आधार और बैंकिंग की उपलब्धता 70 से 80 फीसदी हो जाती है, तो उसे 15 अप्रैल से लागू किया जा सकता है, लेकिन ताजा स्थिति की पूरी जानकारी मंत्रालय और तेल कंपनियों को अब भी नहीं है।
गौरतलब है कि मनमोहन सरकार की इस योजना को आगामी आम चुनावों के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन योजना की सफलता में कई रुकावटें भी हैं। इस बाबत पिछले हफ्ते 13 कैबिनेट मंत्रियों की एक उच्च स्तरीय बैठक भी हुई थी।