केंद्र सरकार ने नई विदेश व्यापार नीति के जरिये निर्यातकों को राहत पैकेज देने की तैयारी कर ली है। इसमें खासतौर पर विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज), छोटे व मझोले उद्योगों और आईटी क्षेत्र को रियायतें मिल सकती हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा है कि 18 अप्रैल को वर्ष 2013-14 के लिए नई नीति का ऐलान होगा। इस समय सरकार का पूरा जोर निर्यात बढ़ाने और व्यापार घाटे को काबू में करने पर है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की वार्षिक आम सभा को संबोधित करते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि वित्त वर्ष 2012-13 में विदेश व्यापार घाटा 192 से 196 अरब डॉलर के बीच रहेगा। बढ़ते व्यापार घाटे से निपटना एक गंभीर चुनौती है।
उन्होंने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को जल्द मंजूरी दिलाने की व्यवस्था की जाएगी। अगले कुछ महीनों में लंबित सभी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी मिल सकती है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
नई विदेश व्यापार नीति के जरिये निर्यात में करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले सेज को कई रियायतें मिल सकती हैं। सेज के लिए जरूरी भूमि के मानकों में छूट मिल सकती है। इसके अलावा सेज की गतिविधियों का दायरा भी बढ़ाया जा सकता है।
इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल और लेदर एक्सपोर्ट की हालत सुधारने के लिए सरकार इन क्षेत्रों को भी कुछ रियायतें दे सकती है। रक्षा क्षेत्र में एफडीआई बढ़ाने का संकेत भी उद्योग मंत्री दे चुके हैं।
दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर के लिए मिलेगी जमीन
उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा है कि दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) देश में औद्योगिक विकास को बल देगा। सरकार कॉरिडोर के आसपास इंटीग्रेटेड टाउनशिप बनाने में तेजी ला रही है। उन्होंने कहा कि डीएमआईसी में निवेशकों को भूमि अधिग्रहण के झंझट में नहीं पड़ना होगा। प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी के तौर पर जमीन राज्य सरकारें मुहैया कराएंगी।
व्यापारियों द्वारा गेहूं खरीद को बढ़ावा
केंद्र सरकार व्यापारियों द्वारा गेहूं की सीधे किसानों से खरीद को बढ़ावा देने के रास्ते तलाश रही है। सीआईआई की वार्षिक आम सभा को संबोधित करने आए केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रो. केवी थॉमस ने कहा कि हमें करीब 280 लाख टन गेहूं की जरूरत है, लेकिन पिछले साल सरकार को 380 लाख टन गेहूं खरीदना पड़ा।
निजी क्षेत्र न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदने का इच्छुक नहीं है। उन्होंने गेहूं की खरीद में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए उद्योग जगत से सुझाव मांगे हैं। गेहूं के भंडारण के सवाल पर उन्होंने सरकार के पास पर्याप्त व्यवस्था होने का भरोसा जताया है। उन्होंने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक के बजट सत्र के दूसरे चरण में पारित होने की उम्मीद जताई है।