कांग्रेस की महत्वाकांक्षी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजना शुरू होने के 50 दिनों में ही अपना रंग दिखाने लगी है। योजना के तहत शुरुआती 50 दिन में ही केंद्रीय सरकार ने 10.94 लाख लाभार्थियों के हाथ में सीधे पैसा पहुंचा दिया है।
डीबीटी से यूपीए सरकार को लाभ होना तय माना जा रहा है, क्योंकि विपक्षी दलों की राज्य सरकारें इसका क्रेडिट नहीं ले पाएंगी। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि लाभ पाने वाला जान गया है कि उसे मिलने वाला धन राज्य सरकार नहीं, बल्कि केंद्र की यूपीए सरकार दे रही है। योजना के तहत 50 दिनों में केंद्र ने 5.37 करोड़ रुपये वितरित किए हैं।
सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 50 दिनों में जारी 5.37 करोड़ रुपये की राशि का सर्वाधिक लाभ आंध्र प्रदेश के सात लाख से अधिक लोगों को मिला है। वहीं उत्तर भारतीय राज्यों के एक लाख से ज्यादा लोग इससे लाभांवित हुए हैं।
चुनावों से ठीक पहले लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे सहायता राशि पहुंचाने वाली योजना को सफल बनाने में सरकार कोई भी मौका चूक नहीं रही है। इस साल एक जनवरी से प्रारंभ की गई इस योजना की घोषणा को पहले आपका पैसा आपके हाथ का नाम दिया गया था।
योजना का क्रेडिट लेने के लिए इसकी घोषणा कांग्रेस मुख्यालय से की गई थी। प्रारंभ में योजना को 20 जिलों में सात केंद्रीय योजनाओं के साथ शुरू किया गया था।
सरकार की योजना है कि एक मार्च तक इसे 20 केंद्रीय योजनाओं में लागू कर दिया जाए। पहले चरण में केंद्र सरकार डीबीटी के जरिए केवल वजीफा और कल्याण की योजनाओं की धनराशि वितरित कर रही है। दूसरे चरण में इसे एलपीजी गैस तथा महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में भी लागू किया जाएगा। दूसरे चरण को चुनावों से करीब छह महीने पहले शुरू करने की योजना है।
इससे एलपीजी सब्सिडी तथा महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में मिलने वाली मजदूरी की कम से कम तीन-चार किश्त लाभार्थियों को मिल जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इस चरण में लाभार्थियों की संख्या में कई गुणा इजाफा हो जाएगा। यूपीए के रणनीतिकारों को आशा है कि खाद्य सुरक्षा में मिलने वाले अनाज और बैंक खातों के जरिए पहुंचने वाला पैसा उसे सत्ता की तीसरी पारी दिला सकता है।