बढ़ते डूबते कर्ज से परेशान बैंक अब दूसरी मुसीबत में फंसते जा रहे हैं। बैंकों ने घाटा कम करने के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का एनपीए अकाउंट एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (एआरसी) को ट्रांसफर कर दिया है, जो अभी तक का सबसे खराब प्रदर्शन है।
खास बात यह है कि अकाउंट ट्रांसफर करने से जो राशि बैंकों को रिकवर होती है, वह भी एआरसी नकदी की कमी के कारण नहीं चुका पा रही हैं। ऐसे में 3 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका बैंकों का एनपीए और 3.30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी कर्ज रिस्ट्रक्चरिंग की मांग के साथ एआरसी से भी पूंजी न मिलने की परेशानी नई सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के लिए खासी चुनौती पेश करने वाली है।
कैसे वसूल किए जाएंगे इतने रुपए?
बैंकिंग इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के अनुसार बैंकों द्वारा एनपीए को एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी में ट्रांसफर करने के मामले अभी तक के रिकॉर्ड स्तर पर हैं,जो कि वित्त वर्ष 2013-14 में 20 हजार करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।
इस मामले पर इंडियन बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि अकाउंट ट्रांसफर करने पर बैंकों को डूबे कर्ज का औसतन 35-40 फीसदी हिस्सा रिटर्न हो जाता है। लेकिन आर्थिक सुस्ती के कारण एआरसी बैंकों को नकदी नहीं दे पा रही हैं।
वह इसके लिए सिक्योरिटी रसीद का उपयोग कर रही हैं। इस कदम से बैंकों को तुरंत औसतन 5-10 फीसदी ही राशि नकद के रूप रिटर्र्न हो रही है। बाकी राशि लौटाने के लिए औसतन 10 साल का समय एआरसी बैंक को दे रही हैं।
कैसे काम करती है एआरसी?
बैंकों के एनपीए का रिकॉर्ड रखने वाली कंपनी एनपीए सोर्स डॉट कॉम के सीएमडी डीके जैन ने बताया कि बैंकों का एनपीए व एआरसी में ट्रांसफर करने की राशि रिकॉर्ड पर है। ऐसे में साफ है कि यह बैंकों की सेहत के लिए अच्छी नहीं है। बैंक घाटा कम करने के लिए 20 हजार करोड़ रुपये के कर्ज एआरसी में कर चुके हैं, ट्रांसफर बैंकों को ट्रांसफर राशि का नहीं मिल पा रहा है पैसा।
बैंकिंग इंडस्ट्री के अनुसार इस समय देश में एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (इंडिया) लिम और रिलायंस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कॉम लिमिटेड प्रमुख एआरसी हैं। बैंक एनपीए खातों को ट्रांसफर कर जहां अपने एनपीए के बोझ को कम करते हैं। वहीं ऐसे खातों को एआरसी कम कीमत में लेकर उसकी रिकवरी करती हैं, जिससे बैंक और एआरसी दोनों को फायदा होता है।