गांवों के कृषि और गैर कृषि इलाके में बिजली आपूर्ति के लिए अलग-अलग फीडर लगाने व गांवों में बिजली आपूर्ति की दशा को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) को अपनी मंजूरी दे दी। वहीं, शहरी इलाके में सब-ट्रांसमिशन एवं डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूती प्रदान करने के लिए सरकार ने एकीकृत बिजली विकास स्कीम (आईपीडीएस) की भी मंजूरी दे दी। दोनों ही फैसले बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित कैबिनेट कमेटी में लिए गए।
कैबिनेट कमेटी की बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई) के अंतर्गत 12वीं व 13वीं योजना के जो काम बचे हुए हैं, उन्हें अब डीडीयूजीजेवाई के तहत पूरा किया जाएगा। आरजीजीवीवाई की शुरुआत कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2005 में की थी।
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक डीडीयूजीजेवाई को लागू करने से ग्रामीण इलाके में बिजली की आपूर्ति में सुधार होगा। पीक लोड में कमी आएगी और ग्रामीण इलाके के घरों को बिजली मिल पाएगी। फैसले के मुताबिक इस परियोजना के तहत तत्काल प्रभाव से काम शुरू कर दिया जाएगा।
कैबिनेट कमेटी के फैसले के मुताबिक कृषि व गैर कृषि फीडर को अलग करने के काम और ग्रामीण इलाके में आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में 43,033 करोड़ रुपये की लागत आएगी। आईपीडीएस के तहत शहरी इलाके में एग्रीगेट ट्रांसफार्मर एंड कमर्शियल लॉस में कमी लाने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे।