छोटे कारोबारियों के लिए सबसे बड़ी समस्या कारोबार के लिए कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) जुटाना है। ऐसे में बिल डिस्काउंटिंग की सुविधा उनकी इस परेशानी को कम कर सकती है।
बिल डिस्काउंटिंग की सुविधा कारोबारी को बैंक और नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (एनएसआईसी) जैसे संस्थानों से मिल सकती है। जब कोई कारोबारी किसी कंपनी को उसके आर्डर की आपूर्ति करता है, तो उसे तुरंत कंपनी के तरफ से भुगतान नहीं मिलता है। कारोबारी बिल डिस्काउंटिंग के तहत वित्तीय संस्थान को आर्डर का बिल देकर तुरंत भुगतान राशि का 75-80 फीसदी तक राशि प्राप्त कर लेता है।
बिल डिस्काउंटिंग के तहत वित्तीय संस्थान कारोबारी को 90 दिन की मोहलत देते हैं। यदि कारोबारी 90 दिन के अंदर बिल के बदले में ली गई भुगतान राशि को नहीं चुका पाता है, तो बैंक उसके बाद कारोबारी के खाते से वह राशि डेबिट कर लेते है। बैंकों से यह सुविधा पाने में खासतौर से छोटे (माइक्रो) कारोबारियों को दिक्कत आती है। बिल डिस्काउंटिंग स्कीम के तहत एनएसआईसी छोटे कारोबारियों को लाभ उठाने का मौका दे रहा है।
क्या है स्कीम
एनएसआईसी छोटे कारोबारियों द्वारा केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, पब्लिक लिमिटेड कंपनियों को दिए गए आर्डर पर बिल डिस्काउंटिंग की सुविधा देता है। कारोबारी को आर्डर देने पर जो बिल मिलता है, उस पर एनएसआईसी फाइनेंस की सुविधा देता है। हालांकि, इसके लिए कारोबारी को बैंक गारंटी एनएसआईसी के फेवर में लेनी होती है।
देना पड़ता है ब्याज
एनएसआईसी की स्कीम का लाभ माइक्रो सेक्टर के तहत आने वाले छोटे कारोबारी उठा सकते हैं। बिल डिस्काउंटिंग के तहत कारोबारी को 90 दिन के अंदर में फाइनेंस की गई राशि को चुकाना पड़ता है। कारोबारी को एनएसआईसी के एसई 1ए रेटिंग पर 12.40 फीसदी ब्याज, एसई 2ए रेटिंग पर 12.90 फीसदी, एसई 1बी रेटिंग पर 12.90 फीसदी और बिना रेटिंग वाली इकाई को 13.40 फीसदी ब्याज चुकाना पड़ता है। हालांकि कारोबारी को ब्याज दरों में छूट का लाभ केवल 90 दिन के अंदर भुगतान पर ही मिलता है। देरी होने पर कारोबारी को सामान्य दर पर अतिरिक्त तीन फीसदी के ब्याज के आधार पर राशि चुकानी पड़ती है।
देना होता है प्रोसेसिंग व सर्विस चार्ज
कारोबारी को प्रोसेसिंग और सर्विस चार्ज एनएसआईसी को चुकाना पड़ता है। सर्विस चार्ज दिन के आधार पर लिया जाता है। वहीं, प्रोसेसिंग चार्ज फाइनेंस के लिए मांगी गई राशि का 0.2 फीसदी होता है, जो कि नॉन रिफंडेबल होती है।
कैसे करें आवेदन
बिल डिस्काउंटिंग स्कीम के आवेदन को भर कर एनएसआईसी के पास जमा किया जाता है, जिसे विक्रेता कारोबारी को भरना होता है। आवेदन पत्र पर कंपनी या फर्म के प्रोपराइटर, पार्टनर, डायरेक्टर या अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर होना जरूरी है।