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निवेश का अच्छा विकल्प है रेकेरिंग डिपॉजिट

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अगर आप फिक्स डिपोजिट करना चाहते हैं पर ज्यादा सेविंग नहीं कर पाते तो आपके लिए एक विकल्प है। इस विकल्प को अपनाकर आप हर माह एक तय रकम खाते में जमा कर एफडी का ब्याज पा सकते हैं। जी हां मैं बात कर रहा हूं रेकेरिंग डिपॉजिट यानी आरडी की।
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यह एक बेहद लोकप्रिय निवेश विकल्प है इसके लिए बैंक में आरडी अकाउंट खुलवाना पड़ता है। आरडी से आपको नियमित कमाई हो सकती है और अपना निवेश लक्ष्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।

ब्याज दर गिरने का डर इसमें कम रहता है और कम रिस्क, सुरक्षित निवेश वाला विकल्प है। आरडी निवेश का बेहतर विकल्प है और ये लंबी अवधि के लिए होती है। रेकेरिंग डिपॉजिट या आरडी की खासियत है कि इसमें नियमित निवेश के साथ फिक्स डिपॉजिट के फायदे मिलते हैं। ब्याज तय होने से आय की निश्चितता रहती है।
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आरडी में एक खास लक्ष्य के लिए रकम इकट्ठा की जा सकती है। आरडी के लॉक इन फीचर के तहत शुरुआत से आखिर तक ब्याज दर एक समान रहती है और डिपॉजिट पर इंटरेस्ट रेट शुरुआत में ही लॉक इन हो जाता है। ब्याज रेट गिरने पर रेकरिंग डिपॉजिट में फायदा होता है और रेकरिंग डिपॉजिट 10 साल तक हो सकती है। इसमें लंबे वक्त का इनवेस्टमेंट प्लान बनाया जा सकता है।

रेकरिंग डिपॉजिट से पहले उसके टैक्स पर असर समझ लेने चाहिए क्योंकि आरडी में निवेश से टैक्स में कोई फायदा नहीं मिलता है। इसपर हर साल मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगेगा और अगर सालाना ब्याज 10,000 रुपये से ज्यादा है तो टीडीएस कटेगा।

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कैसे खोलें आरडी अकाउंट?

आरडी खोलने के दो तरीके हैं। एक तरीका तो है कि खुद बैंक जाकर आरडी खोली जाए और दूसरे ऑनलाइन भी आरडी खोली जा सकती है। आरडी में पेमेंट करने के कई तरीके हैं जैसे कुछ बैंक शुरुआत में चेक मांगते हैं और इन्हीं से बाद में सेविंग अकाउंट से सीधे डेबिट किया जा सकता है।

रेकेरिंग डिपॉजिट की ऑनलाइन प्रक्रिया में नेट बैंकिंग अकाउंट में लॉग इन जरूरी होता है और लॉग इन के बाद डिपॉजिट के सेक्शन में जाना होगा। ऑनलाइन आवेदन के लिए अलग अलग जानकारी देनी होगी। निवेश की रकम और अवधि भरनी होगी और राशि का बैंक अकाउंट से ऑनलाइन पेमेंट हो जाएगा।

अगर कई अकाउंट हैं तो सावधानी से अकाउंट नंबर डालें और अकाउंट होल्डर का नाम सावधानी से भरें। अकाउंट होल्डर का नाम और निवेशक का नाम सही होना चाहिए।

आरडी में हर महीने एक निश्चित रकम जमा करने की सुविधा मिलती है और इस आय पर एक निश्चित ब्याज मिलता है। ये लंबे वक्त तक जारी रख सकते हैं और इसमें खाता खोलते वक्त अवधि तय हो जाती है। अवधि खत्म होने पर ब्याज समेत भुगतान मिल जाता है।

अब आप मोबाइल एप से भी आरडी खुलवा सकते हैं। रेकरिंग डिपॉजिट निवेशक की सेविंग पर निर्भर करता है और हर महीने एक निश्चित रकम का निवेश इसमें कर सकते हैं।

रेकरिंग डिपॉजिट से सेविंग मैनेजमेंट आसान होता है और बार बार फिक्स डिपॉजिट के झंझट से मुक्ति मिल जाती है। इसके जरिए रीइन्वेस्टमेंट के पचड़ों से भी मुक्ति मिल जाती है और निवेश और ब्याज का हिसाब-किताब आसान हो जाता है।  

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