लोन न चुकाने वाले डिफाल्टरों के साथ-साथ उन्हें कर्ज दिलाने वाले गारंटरों पर भी गाज गिरनी शुरू हो गई है।
इसकी शुरुआत सरकारी क्षेत्र के इलाहाबाद बैंक ने डिफाल्टर के साथ-साथ उसके दो गारंटरों के नाम व फोटो विज्ञापन के जरिए अखबार में छपवाते हुए कर दी है।
बैंक ने यह कदम लोन की अदायगी के लिए कर्ज लेने वाले ग्राहकों के साथ-साथ उनके गारंटरों पर भी दबाव बनाने के मकसद से उठाया है।
इलाहाबाद बैंक ने सार्वजनिक सूचना (पब्लिक नोटिस) के तौर पर एक डिफाल्टर कंपनी और उनके दो गारंटरों के फोटो अखबारों में प्रकाशित करवाए हैं।
बैंक ने कंपनी की दो संपत्तियों को गिरवी रखने के नोटिस के साथ गारंटरों के फोटो छपवाए हैं। कंपनी पर कुल 365 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने डिफाल्टरों पर दबाव बनाने के मकसद से इसी वर्ष की शुरुआत में डिफाल्टरों की फोटो सार्वजनिक करने का निर्णय लिया था।
इसके तहत भारतीय स्टेट बैंक, यूको बैंक, इलाहाबाद बैंक, इंडियन बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक ने डिफाल्टरों की फोटो और उनके संबंध में विस्तृत सूचनाएं प्रकाशित करवाईं। इन ब्योरों को बैंक की सभी शाखाओं एवं कम्युनिटी सेंटरों तथा डिफाल्टरों के निवास के आसपास चिपकाया भी गया।
बैंकों ने इस दिशा में अब और सख्ती करते हुए गारंटरों की फोटो भी सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है। बैंकों का कहना है कि डिफाल्टर के नाम पर नोटिस जारी करने के 15 दिन के भीतर अगर कर्ज नहीं चुकाया जाता है, तो गारंटरों की फोटो, नाम और पता सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
हालांकि निजी क्षेत्र के बैंकों ने इस मामले में थोड़ी नरमी बरतते हुए डिफाल्टरों अथवा गारंटरों की फोटो नहीं छपवाए हैं, लेकिन उनके संबंध में सभी जानकारियां सार्वजनिक कर दी गई हैं।
गौरतलब है कि वित मंत्री पी चिदंबरम ने कुछ दिन पहले लोन की अदायगी न होने पर गहरी चिंता जताते हुए सरकारी क्षेत्र के बैंकों से बडे़ डिफाल्टरों पर ध्यान केंद्रित करने और उनके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।