सुदूर गांवों में रहने वाले ग्रामीण परिवारों को अब घर बैठे बैंकिंग की सुविधा मिल सकेगी।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) निजी क्षेत्र की कंपनी स्टारफिन इंडिया के साथ मिलकर कियोस्क बैंकिंग शुरू करने जा रहा है।
इसके तहत छोटे आबादी वाले गांवों, आदिवासी परिवारों को विभिन्न केंद्रीय योजनाओं से मिलने वाली सुविधाओं (नकद) के साथ ही निजी लेनदेन के लिए एसबीआई की शाखा तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि शाखा खुद उपभोक्ता के स्थान/गांव तक आकर लेनदेन को आसान एवं सुलभ बनाएगी।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक मनरेगा का भुगतान, पेंशन व विभिन्न केंद्रीय योजनाओं की सब्सिडी के लिए लाभार्थियों को बैंक या डाकघर (जहां भी खाता) के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
अन्य बैंकिंग जरूरतों के लिए ग्रामीण परिवारों को दूरदराज एसबीआई की शाखा में जाना पड़ता है जहां लंबा समय लग जाता है। इन्हीं दिक्कतों का समाधान करने के लिए कियोस्क बैंकिंग की पहल की गई है।
इसकी खास बात यह कि ग्रामीण परिवारों को इस सुविधा के लिए खाता खुलवाने में किसी तरह का शुल्क नहीं देना होगा।
स्टारफिन इंडिया के निदेशक जीतेंद्र सिंह ने बताया कि कियोस्क बैंकिंग में गरीब ग्रामीणों का नो फ्रिल एकाउंट खोला जाता है।
नो फ्रिल एकाउंट ऐसा खाता है जिसे खोलने के लिए ग्रामीणों को कोई न्यूनतम राशि जमा नहीं करनी पड़ती तथा शहरों/महानगरों के उपभोक्ताओं को केवल सौ रुपये की मामूली रकम ही जमा करनी होती है।
उपभोक्ता अपने पहचान पत्र और एक पासपोर्ट साइज़ फोटोग्राफ के साथ अपना खाता खोल सकता है और स्टारफिन कस्टमर सर्विस केंद्र पर नकद राशि जमा कर सकता है या पैसे निकाल सकता है।
साथ ही मनी ट्रांसफर की सेवाओं का भी लाभ उठा सकता है। इस वर्ष के अंत तक कंपनी ने उत्तर भारत के दो हजार से अधिक गांवों में कियोस्क बैंकिंग शुरू करने का लक्ष्य रखा है।