बैंकों के डूबते कर्ज की बढ़ती संख्या पर लगाम कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने सख्त कदमों को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।
रिजर्व बैंक की सबसे पहली नजर उन कंपनियों और कारोबारियों पर है जो कि जानबूझ कर कर्ज नहीं चुका रहे हैं। ऐसे लोगों को आने वाले दिनों में जहां नए कर्ज लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ेगा, वहीं उन्हें कर्ज भी महंगा मिलेगा। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने कर्ज को डूबने से बचाने के लिए बैंकों की भी जिम्मेदारी पहले से ज्यादा करने की तैयारी कर ली है।
मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी डिस्कशन पेपर में कहा गया है कि बैंकों को पहले से इस तरह के खातों की पहचान करनी होगी, जो कि डिफॉल्ट कर सकते हैं। इसके लिए रिजर्व बैंक ने प्रस्ताव दिया है कि बैंक एक स्पेशल मेंशन अकाउंट का वर्ग बनाए। इसके तहत वह खाते शामिल होंगे, जिनके कर्ज चुकाने में 30 से 90 दिनों की देरी हो रही है। रिजर्व बैंक ने इसके अलावा कर्ज की वसूली प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष करने की भी बात कही है।
इस दिशा में बेहतर काम करने वाले बैंकों को विशेष प्रोत्साहन भी मिलेगा। इसके अलावा रिस्ट्रक्चरिंग (कर्ज अदायगी में रियायत) के प्रस्तावों पर रिजर्व बैंक ने कहा है कि ऐसे कर्ज जो कि 500 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की राशि के हैं, उसकी रिस्ट्रक्चरिंग की मंजूरी बैंकों से आरबीआई को लेनी होगी।
रिजर्व बैंक ने साफ तौर पर जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वालों के संबंध में कहा है कि जो ग्राहक बैंकों को सहयोग नहीं करेंगे, उनके लिए नए कर्ज लेना मुश्किल और महंगा भी होगा।