सीडीएमए स्पेक्ट्रम की नीलामी 11 मार्च से होगी। किसी कंपनी के भाग न लेने के चलते 11 मार्च से शुरू होने वाली जीएसएम स्पेक्ट्रम की दिल्ली, मुंबई समेत 5 सर्किलों में नीलामी रद्द हो गई है।
सीडीएमए स्पेक्ट्रम के 800 मेगाहर्ट्ज बैंड की नीलामी 11 मार्च को होगी। नीलामी में सिर्फ एक कंपनी के भाग लेने के चलते नीलामी एक राउंड में ही खत्म हो जाएगी और स्पेक्ट्रम बेस प्राइस पर बिकेगा। एमटीएस ब्रैंड के तहत सीडीएम प्लेटफार्म पर सर्विस देने वाली सिस्तमा श्याम ने 11 सर्किल में स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए अर्जी दी है। कंपनी को इसके लिए 5,623 करोड़ रुपये देने होंगे।
जाहिर है कंपनियों की नीलामी में दिलचस्पी न होने से अब सरकार का नीलामी के जरिये 40,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य पूरा होना काफी मुश्किल हो जाएगा। नीलामी के दूसरी बार फेल होने के बाद सरकार क्या फिर से इन सर्किल में स्पेक्ट्रम नीलामी रखेगी। इसका फैसला जल्द ईजीओएम करेगी, लेकिन कंपनियों का कहना है कि स्पेक्ट्रम का दाम वाजिब नहीं है। कीमत हाल में ब्रिटेन, जर्मनी जैसे विकसित देशों में हुई 4जी नीलामी से भी कहीं ज्यादा है।
900 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की रिफार्मिंग पर टेलीकॉम विभाग को 7 मार्च तक फैसला लेना है। इसी बीच सरकार स्पेक्ट्रम की तीसरे राउंड की नीलामी की तैयारी में जुट गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सरकार को 20 सर्किल में बचे सारे स्पेक्ट्रम की नीलामी करनी है।
भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेल्यूलर में से किसी ने भी नीलामी में भाग नहीं लिया, जबकि इन कंपनियों के दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के लाइसेंस अगले साल नवंबर में खत्म हो रहे हैं। इन कंपनियों के पास 900 मेगाहर्ट्ज बैंड मौजूद हैं, जिसकी कीमत 1,800 मेगाहर्ट्ज से दोगुनी है।
900 मेगाहर्ट्ज की सिग्नल कवरेज दूसरे स्पेक्ट्रम के मुकाबले बेहतर है। भारती एयरटेल और वोडाफोन ने दिल्ली हाईकोर्ट में 900 मेगाहर्ट्ज नीलामी के खिलाफ याचिका दायर की हुई है। कंपनियों का कहना है कि उनके लाइसेंस शर्तों के मुताबिक लाइसेंस की समय सीमा 10 साल तक बढ़नी चाहिए। कोर्ट ने सरकार से इस पर जवाब मांगा है।