वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अर्थव्यवस्था में सुधार का आधार तैयार कर लिया है। बजट की घोषणाओं के मुताबिक अर्थव्यवस्था के सभी सेक्टरों में विश्वास बहाली के लिए अल्पावधि और दीर्घावधि, दोनों तरह के कदम उठाए गए हैं।
दरअसल, वित्त मंत्री ने मुश्किल दौर में बजट पेश किया है। इसके बावजूद उन्होंने ऐसे कदमों की घोषणा की है, जो अगले दो-तीन साल के दौरान विकास दर में रफ्तार का आधार बन सकती हैं। उद्योग जगत चाहता था कि सरकार उस पर नए टैक्स थोपने की कोशिश से बाज आए।
सरकार ने उद्योग की इस चिंता को समझा है और पहले से चले आ रहे टैक्स प्रावधानों में कोई बदलाव न करने का वादा किया है। इससे टैक्स नियमों की अनिश्चितता खत्म होगी और इसमें एक स्थिरता आएगी। निवेशकों के लिए सरकार का यह कदम काफी मुफीद साबित होगा और इससे उन्हें निवेश करने में हिचकिचाहट नहीं होगी। जाहिर है निवेशकों के माकूल टैक्स नियमों से निवेश बढ़ेगा और ग्रोथ को रफ्तार मिलेगी।