खाद्य उत्पादन में सुधार के बावजूद खाद्य सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए कृषि क्षेत्र में अभी व्यापक सुधार की जरूरत है। लोकसभा में बुधवार को पेश हुई वर्ष 2012-13 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि कृषि को लाभकारी बनाकर किसानों का रुझान इस ओर बढ़ाया जा सकता है। कृषि क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े निवेश की दरकार है। इसे निजी क्षेत्र के जरिए ही पूरा किया जा सकता है।
आर्थिक समीक्षा में देश की बढ़ती आबादी को भोजन उपलब्ध कराने के लिए कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी की जरूरत बताई गई है। हालांकि पिछले वर्ष देश में अनाज का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। इस वर्ष भी अनाज उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है। इसके बावजूद जिस तेजी से कृषि क्षेत्र का विकास होना चाहिए, वह नहीं हो रहा है। पिछले पांच साल में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर चार प्रतिशत के लक्ष्य से कम रही है।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.6 प्रतिशत रही, जो लक्ष्य के मुकाबले 0.4 फीसदी कम है। हालांकि राहत की बात यह है कि नौवीं और दसवीं योजना के मुकाबले यह दर अधिक रही है। इन योजनाओं में क्रमश: 2.5 फीसदी और 2.4 फीसदी वृद्धि दर थी।
सरकार का कहना है कि बाजार की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए स्थिर नीतियों, बुनियादी ढांचे में निजी निवेश बढ़ाए जाने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में सुधार, खाद्य कीमत और भंडारण प्रबंधन में सुधार के साथ ही प्रत्याशित व्यापार नीति अपनाए जाने की जरूरत है। समीक्षा में इन कदमों के साथ कौशल विकास तथा बेहतर शोध एवं विकास, ऋण और बीजों की आपूर्ति में सुधार की दिशा में पहल करने की जरूरत बताई गई है।