रेलमंत्री पवन बंसल किराया न बढ़ाकर मुसाफिरों पर चाहे जो अहसान जता रहे हों, लेकिन डीजल सरचार्ज तथा टिकटों के आरक्षण एवं कैंसिलेशन दर में वृद्धि कर पिछले दरवाजे से उन्होंने लोगों की जेब से चुपचाप 5000 करोड़ रुपये निकालने का इंतजाम कर लिया है। जबकि उन्हीं के दावे के अनुसार डीजल की कीमतों में वृद्धि से रेलवे पर 3300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।
रेल मंत्री ने बजट भाषण में डीजल कीमतों में तेजी के बावजूद यात्रियों पर किराये का अतिरिक्त भार नहीं डालने का दावा किया था। उन्होंने दावा किया था कि यात्री ट्रेनों पर डीजल मद में 850 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे जिसे रेलवे खुद वहन करेगा। लेकिन आंकड़े उनके दावों को झुठलाते हैं।
उन्होंने बिना किराया बढ़ाए लागत से ज्यादा वसूलने का इंतजाम कर लिया है। तत्काल टिकट, अन्य टिकटों के आरक्षण तथा निरस्तीकरण के शुल्क में की गई वृद्धि से रेलवे को 883 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी। मालभाड़े पर डीजल प्रभार से रेलवे 4200 करोड़ रुपये कमाएगा।
बंसल ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि स्वतंत्र रेल टैरिफ अथारिटी बनाने के लिए विभाग द्वारा कैबिनेट नोट तैयार किया जा चुका है। विभिन्न विभागों से विमर्श के लिए इसे संबंधित मंत्रियों को भेज दिया गया है। उनकी राय मिलने के बाद हम कैबिनेट में यह प्रस्ताव रखेंगे।
कैबिनेट से हरी झंडी मिल गई तो बजट सत्र में ही इसे हम संसद में पेश कर देंगे। संसद से बिल के पास होने के बाद ही हम अथारिटी को बनाने की पहल कर सकेंगे। जब तक टैरिफ अथारिटी का गठन नहीं हो जाता हम फ्यूल एडजस्टमेंट कंपोनेट (एफएसी) के माध्यम से मालभाड़ा व किराये की छमाही आधार पर समीक्षा करते रहेंगे।