स्टेथेस्कोप लगाकर दिल की धड़कन तो आपने कई बार सुनी होगी लेकिन इन मोहतरमा को अपने दिल की आवाज बिना सटेथेस्कोप के भी सुनाई देती थी। इतना ही नहीं ये तो अपने आंखों और दिमाग की आवाज भी सुन सकती थीं।
47 साल की जूली रेडफर्न को एक दुर्लभ किस्म की बीमारी (सुपीरियर कनाल डीहाइसिंस सिंड्रोम) थी। इस बीमारी में व्यक्ति के भीतरी कान में आवाज काफी तेज आती है। जिसकी वजह से वो अपने शरीर के अंदर से आने वाली हर आवाज बहुत आसानी से सुन पाता है।
डेली मेल के मुताबिक, जूली भी इसी सिंड्रोम से पीड़ित थीं और इसीलिए उन्हें अपने आंख, दिमाग और यहां तक कि शरीर में खून के बहने की आवाज भी सुनाई देती थी।
प्यार का अजीब तरीका
आप भले ही इसे कुदरत का करिश्मा समझ रहे हों लेकिन जूली के लिए ये किसी प्रताड़ना से कम नहीं था। वो हर समय आवाजों से घिरी रहती थीं। दूसरों की बातें ध्यान से नहीं सुन पाती थीं और न ही सुकून से रह पाती थीं।
जूली एक कंपनी में रिसेप्शनिसट हैं लेकिन अपनी इस नौकरी को संभालने में उन्हें खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इधर फोन की घंटी बजती थी और उधर उन्हें अपनी आंखों की आवाज सुनाई देने लगती थी।
लेकिन सात साल तक इस परेशानी से जूझने के बाद उन्होंने अंत में सर्जरी का सहारा लिया। लांसशायर में रहने वाली जूली का कहना है कि 40 साल की उम्र में उन्हें पहली बार इस बीमारी का पता चला। इसके बारे में जब उन्होंने अपने पति को बताया तो उन्होंने इस बहुत ही हल्के में लिया। यहां तक कि डॉक्टरों ने भी इसे उम्र का हवाला देकर कोई बीमारी होने से नकार दिया।
दादी का ये कैसा दर्द?
फिर एक दिन जूली ने अपने ही जैसे एक आदमी के बारे में पढ़ा और वो ये आर्टिकल लेकर डॉक्टर के पास पहुंची, उसके बाद कहीं जाकर इस बीमारी का पता चल सका।
दरअसल इस बीमारी में कान के अंदर की हड्डी काफी पतली होती है जिसकी वजह से ये आवाजें सुनाई देती हैं। हालांकि इस बीमारी से पीड़ित होने वाली जूली अकेली नहीं हैं। साल 1998 में ऐसा ही एक मामला पहले भी आया था।