दुनियाभर में अंतिम क्रिया कर्म की कई रस्में हैं। कुछ में लोग जलाते हैं और कुछ में दफनाते हैं लेकिन तिब्बत में अंतिम क्रिया-कर्म की विधि बिल्कुल ही अलग और काफी हद तक हैरान करने वाली है।
जहां चील, कौओं को लाश खिलाकर ही मुक्ति समझी जाती है। अमूमन लोग लाश को लोग दफनाते या जलाते इसीलिए हैं ताकि जानवर उससे छेड़छाड़ न कर सके लेकिन यहां इसका बिल्कुल उलट है।
तिब्बत में बौद्घ संप्रदाय के लोग खुले आकाश के नीचे लाश का अंतिम संस्कार करते हैं। ये लोग लाश को छोट-छोटे टुकडो़ में काट कर आसमान के नीचे फेंक देते हैं।
दरअसल बौद्घ संप्रदाय में शरीर को नश्वर मानते हैं और वो इसे संरक्षित करने में भरोसा नहीं करते। बल्कि उनका मानना है कि अगर ये शरीर भी किसी के काम आ सके तो उससे बेहतर कुछ भी नहीं। इसलिए वो किसी के मर जाने पर उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े करके उसे खुले आसमान में फेंक देते हैं।
करीब 80 फीसदी तिब्बती बौद्घ इसी तरह से अंतिम संस्कार करते हैं।