अद्भुत कला के धनी जतिंद्रपाल सिंह लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में आठ बार, इंडिया बुक्स ऑफ रिकॉर्ड में 17 बार और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में तीन बार अपना नाम दर्ज करवा चुके हैं।
हांसी के रहने वाले शिक्षक जतिंद्रपाल सिंह ने विशेष बातचीत में बताया वे 20 साल से सूक्ष्म कृतियां बना रहे हैं। इन दिनों वे डेढ़ इंच के धागे पर 125 झंडे बनाने में जुटे हुए हैं।
उन्होंने एक इंच का हैंडपंप, बजाने वाला ड्रम सेट और छोटा तराजू बनाकर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया।
इसके अलावा जतिंद्रपाल ने चावला के दाने पर 118 देशों के झंडे, एक सेंटीमीटर का तराजू, एक इंच का चरखा जिसमें कताई की जा सकती है, तीन मिलीमीटर की क्रिकेट वर्ल्ड कप की ट्राफी, एक सेंटीमीटर शतरंज और कैरम बोर्ड गोटियां सहित, सूई में 2035 धागे डालना, एक सेंटीमीटर का पेन जिसमें स्याही डाल चलाया जा सकता है, एक मिलीमीटर चौड़ाई का ग्रीटिंग, पेंसिल के सिक्के से मूर्ति बनाना, छोटे साइज में हनुमान चालीसा लिखकर रिकॉर्ड बनाए हैं।
जतिंद्रपाल ने बताया कि उन्हें बचपन से पेंटिंग बनाने का शौक था। वे स्कूल से आते ही अपने भाई की दुकान पर पेंटिंग करने चले जाते थे। इसी दौरान ही उन्हें सूक्ष्म वस्तुओं बनाने का कार्य शुरू किया अब तक वे इसे बना रहे हैं।
1994 में पहली बार छोटी पतंग बनाकर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करवाया। अब उनकी इच्छा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाने की है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियों को सरकार से जीतने पर अनुदान राशि मिलती है।
ऐसे में कला के क्षेत्र में उन्हें भी आर्थिक रूप से मदद मिलनी चाहिए क्योंकि उन्होंने अब तक 28 रिकॉर्ड बनाए हैं लेकिन उन्हें आज तक कोई प्रोत्साहन नहीं दिया।
सीएम और राज्यपाल ने किया था सम्मानित
जतिंद्रपाल को उनकी उपलब्धियों के लिए 1993 में राज्यपाल धनिकलाल मंडल,1996 में राज्यपाल महावीर प्रसाद और 2007 में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से सम्मानित कर चुके हैं।
शाबास इंडिया में लिया हिस्सा
जतिंद्रपाल ने जी टीवी के शाबास इंडिया नामक कार्यक्रम में भाग लिया था। इसमें उन्होंने पांच मिनट में 505 धागे सूई में डालकर दिखाए थे।
जतिंद्रपाल फिलहाल एसडी मॉडर्न स्कूल में ड्राइंग टीचर हैं और बाद में बच्चों को आर्ट एंड क्राफ्ट सिखाते हैं।