वो कहते हैं न कि जज्बा हो तो इंसान नामुमकिन को भी मुमकिन बना सकता है और हांगकांग की ये लड़की उसी की मिसाल है। तसांग तजक्वन देख नहीं सकती लेकिन वो पढ़ना चाहती थी।
डेली मेल के अनुसार, मुसीबत ये थी कि उसकी आंखों की रोशनी के साथ ही उसकी उंगलियों की संवेदनशीलता भी इतनी कम थी कि वो ब्रेल लिपि तक नहीं पढ़ सकती थी। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और अपने होंठ को ही अपना हथियार बना लिया।
नेत्रहीन ने किया कुरान कंठस्थ
वैसे तसांग को खुद भी नहीं पता कि ये कब और कैसे शुरू हुआ लेकिन पांच साल की उम्र से ही वो होंठ से छू-छूकर पढ़ाई कर रही है।
नेत्रहीन सुनकर देगें एक्जाम
हमारे शरीर में होंठ, जीभ और उंगलियां तीन ऐसे अंग हैं जो दो चीजों के बीच में अंतर पहचान सकते हैं। हालांकि ये कोई पहला मामला नहीं है लेकिन ये अपने आप में खास जरूर है। तसांग काफी आराम से ब्रेल में लिखे वाक्य होंठ से छू-छूकर पढ़ लेती हैं।
ऐसा नहीं है कि वो उंगली रख-रखकर पढ़ नहीं सकतीं लेकिन होंठ से पढ़ना उनके लिए ज्यादा आरामदायक है।