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शनि मंगल की अशुभ स्थिति से प्राकृतिक आपदा की आशंका, जानें क्या कहते हैं ज्योतिषी

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शनि महाराज किसी भी राशि में करीब ढ़ाई साल रहते हैं। पिछले वर्ष 2 नवंबर से शनि मंगल की राशि में चल रहे हैं। जब से शनि मंगल की राशि वृश्चिक राशि में आए हैं, तबसे प्राकृतिक आपदाओं की भरमार हो रही, एक के बाद एक आघात का सामना करना पड़ रहा है।
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22 मार्च से तो लगातार मंगल की शनि पर मृत्युकारक दृष्टि भी पड़ रही है। यही कारण है कि शनि मंगल मिलकर इन दिनों आफत मचाए हुए हैं। 3 मई की रात 11 बजकर 53 मिनट से मंगल अपनी अकारक 'वृषभ' राशि में आ जाएंगे।

यह शनिदेव की कारक राशि है इसी के साथ इन दोनों की परस्पर मारक दृष्टि भी पड़ेगी यानी स्थिति बेहतर हाने की बजाय और बिगड़ सकती है। इसे यूं समझ सकते हैं कि प्राकृतिक घटनाओं और संकटों का दौर स्वयं रूद्र ने संभाल लिया है।
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आपके जीवन को इस तरह प्रभावित करते हैं शनि मंगल 

शनि मंगल की अशुभ स्थिति के कारण संकट आते रह सकते हैं। पौराणिक शास्त्रों के अनुसार अमंगल से बचने और अपने बचाव के लिए महाकाल के रुद्र अवतार की प्रार्थना करनी चाहिए। निजी कुंडलियो में भी यह स्थितियां आकस्मिक घटनाओं का कारण बनती है।

प्रतियोगिता में आशातीत सफलता, चुनावों में विजय, व्यवसाय में उन्नति, संतान सुख, मकान-वाहन का सुख अप्रत्याशित रूप से विवाह तय होना, नौकरी प्रमोशन, स्थान परिवर्तन, दुर्घटना महत्वाकांक्षा की पूर्ति, संतान सुख, नौकरी छूटना, कार्यस्थल या शहर-देश से दूर जाना, विदेश यात्रा आदि शनि-मंगल की दृष्टि-युति के आकस्मिक परिणाम होते हैं।

विपत्ति या संयोगों की प्रमुखता वाले दौर में वर्तमान में अपने बचाव के लिए यथाशक्ति सत्कर्म करें। बड़ों के प्रति आदरभाव रखें। इससे शनिदेव प्रसन्न रहेंगें।
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