महाकुंभ के दौरान संगम में डुबकी लगाने परदेस से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। स्नान किया, तफरीह की और चलते बने लेकिन त्रिनिदाद से आया एक परिवार यहां पुरखों की तलाश कर रहा है। त्रिनिदाद के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जेरी नरेश पत्नी के साथ संगमनगरी पहुंचे हैं। अपने पुरखों की खोज में वह प्रतापगढ़ भी जाएंगे। उनकी पत्नी रानी लखन त्रिनिदाद में ही वित्त सलाहकार हैं।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में जेरी नरेश ने बताया कि उन्हें महाकुंभ देखने की उत्सुकता तो थी ही लेकिन उससे कहीं अधिक पूर्वजों की जमीं देखने की तमन्ना थी। बताया कि खोजबीन में यह पता चला है कि प्रतापगढ़ के पीठापुर गांव में उनके पूर्वज रहते थे। गांव को देखने की आस लिए इतनी दूर चले आए।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जेरी के मुताबिक उनकी दादी अपने डेढ़ वर्षीय बेटे को लेकर त्रिनिदाद पहुंच गई थी। जबकि उनके दादा यहीं रह गए थे। बकौल जेरी उनकी दादी को बहला फुसलाकर ले जाया गया था। छह भाई और दो बहनों में से एक पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जेरी नरेश के मुताबिक उनके पिता लाल बहादुर सिंह और मां धनराज ने कड़ी मेहनत करके कारोबार शुरू किया। साल दर साल कारोबार बढ़ता गया और आज की तारीख में परिवार की गिनती देश के बड़े व्यापारियों में होती है।
जेरी ने बताया कि उनकी दादी गांव से जुड़ी तमाम पुरानी कहानियां बताती थीं, जो उन्हें अब भी याद हैं लेकिन इतना लंबा अर्सा बीतने के कारण वह कुछ साफ साफ नहीं बता सकी थीं। पूर्वजों और भारत से जुड़ी जो भी जानकारियां थीं वह अपने बच्चों बेटी वर्षा और बेटे विनय को भी बताते हैं। वह कहते हैं कि भारत विकासशील देशों में से एक है जो आने वाले समय में पूरे विश्व में परचम लहराएगा। उनका मानना है कि ज्यादातर भारतीय मेहनती, ईमानदार और संवेदनशील हैं।
‘इंडी रूट्स’ की मदद से पहुंचे मिला पुरखों का गांव
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जेरी नरेश प्रवासियों के पुरखों की तलाश करने वाली संस्था ‘इंडी रूट्स’ के जरिए अपने पुरखों के गांव तक पहुंचे। इंडी रूट्स ने पीठापुर गांव निवासी उनके पुरखों के बारे में जानकारियां जुटाई।
इंडी रूट्स से जुड़े एमएन तिवारी का कहना है कि संस्था दुनिया के कोने कोने में बसे प्रवासी भारतीयों के पूर्वजों के बारे में पूरी जानकारियां जुटाकर उन्हें पहुंचाने का प्रयास करती है। संस्था अब तक सैकड़ों प्रवासियों को उनके पुरखों से मिला चुकी है।