बारिश के बाद बिगड़े हालात से महाकुंभ में कल्पवासी निकलने लगे थे लेकिन अच्छे मौसम ने फिर से संगम क्षेत्र की रौनक लौटा दी है। बड़ी संख्या में कल्पवासियों ने महाकुंभ छोड़ने का विचार त्याग दिया और संकल्प के अनुरूप पूजा पाठ शुरू कर दिया है। मेला में कथा, प्रवचन के साथ रामलीलाओं के मंचन का दौरा भी जारी है।
मेला क्षेत्र में त्रिवेणी मार्ग और काली मार्ग पर बसे अखाड़ों के काफी साधु-संत महाकुंभ से विदा हो गए हैं लेकिन इन अखाड़ों से जुड़े कई संत-महात्मा अभी मेला में रुके हैं। हालांकि बारिश के कारण उन्होंने पहले ही जाने की तैयारी कर ली थी लेकिन स्थिति में सुधार होने के साथ अब उन्होंने अंत में मेला से विदा होने की तैयारी की है। इन संत-महात्माओं के साथ कल्पवासी भी अब माघी पूर्णिमा के बाद ही यहां से रवाना होंगे।
15 एवं 16 फरवरी को हुई जबरदस्त बारिश से मेला क्षेत्र का बड़ा इलाका पूरी तरह तहस नहस हो गया था। बारिश से तंबू, शिविर उखड़ गए तो चकर्ड प्लेट मार्ग धंस गए।
भयंकर जलभराव होने के कारण साधु-संतों और कल्पवासियों ने वापसी के लिए सामान समेट लिया लेकिन इसके बाद मेला प्रशासन, पीडब्ल्यूडी, जल निगम और सिंचाई विभाग ने सेना के साथ मिलकर महाकुंभ क्षेत्र को फिर से संवारा।
पिछले चार दिनों में ज्यादातर चकर्ड प्लेट मार्ग दुरुस्त हो गए तो बारिश में ढह गए तंबू, शिविर फिर से खड़े हो गए। जलभराव की समस्या भी खत्म हो गई। मौसम साफ होने के साथ ही सेक्टर सात, आठ, नौ, 11 और सेक्टर 14 के कई शिविरों में कथा, प्रवचन के साथ रामलीलाओं का मंचन भी शुरू हो गया है।
इसमें कल्पवासियों के साथ मेला घूमने आने वालों की भीड़ जुट रही है। धर्म-अध्यात्म के बीच मेला घूमने आने वालों की बढ़ती भीड़ से संगम क्षेत्र ने पिकनिक स्पॉट का रूप ले लिया है।