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नित्यानंद को महामंडलेश्वर बनाने पर मचा बवाल

Thu, 14 Feb 2013 09:28 AM IST
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/ब्यूरो
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जूना अखाड़े की ओर से राधे मां को लेकर उठा विवाद अभी थमा भी नहीं था कि महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से सेक्स स्कैंडल के आरोपी नित्यानंद पीठम के पीठाधीश्वर नित्यानंद स्वामी को महामंडलेश्वर की पदवी दिए जाने पर कुंभ नगरी में नया बवाल मच गया है। नित्यानंद स्वामी को गुपचुप तरीके से महामंडलेश्वर की पदवी दिए जाने की निंदा करते हुए विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया है।
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राधे मां को महामंडलेश्वर बनाने वाले जूना अखाड़े से जुड़े कई संतों ने भी नित्यानंद को महामंडलेश्वर बनाने का विरोध किया है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने इस कदम को धर्म का माखौल बताया। उन्होंने कहा कि यह निंदनीय और घृणित काम है। नित्यानंद जैसे लोगों को ऐसी पदवी देना धर्म और मानवता पर कुठाराघात है। उन्हें अविलंब उनके पद से हटाया जाना चाहिए। ऐसा नहीं होगा तो अखाड़ा परिषद की ओर से कार्रवाई की जाएगी।

गलत परंपरा की नींव
निरंजनी के श्रीमहंत रवींद्र पुरी के मुताबिक सनातन धर्म की रक्षा के लिए अखाड़ों का गठन हुआ था, अब नित्यानंद जैसे लोगों को पदवी देकर अखाड़े ही उस उदे्दश्य को नष्ट कर रहे हैं। नित्यानंद को तो महात्मा ही नहीं कहा जाना चाहिए। अग्नि अखाड़े के सभापति श्रीमहंत बापू गोपालानंद ब्रह्मचारी का कहना है कि ऐसी परंपरा से अखाड़ों की मर्यादा तार-तार हुई है, निर्वाणी अखाड़े ने गलत परंपरा की नींव डाली है। आनंद अखाड़े के श्रीमहंत राजेश्वरानंद ने कहा कि महानिर्वाणी को ऐसा नहीं करना चाहिए, ऐसे लोगों को महामंडलेश्वर बनाने से धर्म की मर्यादा धूमिल होती है।
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सनातन धर्म का अपमान
तीनों अनी अखाड़े के प्रधानमंत्री महंत माधवदास इससे बेहद खफा हैं। कहा कि चाहे जिसको महामंडलेश्वर और जगद्गुरु बना दिया जा रहा है। जो व्यक्ति कल तक कई तरह के कुकर्मों का आरोपी रहा हो, उसे ऐसी पदवी देना दुर्भाग्यपूर्ण और सनातन धर्म का अपमान है। निर्मोही अनी अखाड़े के महंत राजेंद्र दास ने कहा कि ऐसे विवादित व्यक्ति को महामंडलेश्वर नहीं बनाना चाहिए जो समाज और देश के लिए कलंक है।

'धर्म के प्रति कम हो जाएगा लोगों का विश्वास'
पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के श्रीमंहत दुर्गादास भी इस फैसले से निराश हैं। उनका कहना है कि महामंडलेश्वर का पद सम्माननीय और जिम्मेदारी वाला है। इस पर वह व्यक्ति आए जो निर्विवाद हो, यदि वह किसी तरह के विवाद से घिरा हो तो उसे स्वयं ही मना कर देना चाहिए। निर्मल पंचायती अखाड़े के महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री के मुताबिक नित्यानंद जैसे लोग धर्माचार्य बनेंगे तो लोगों का धर्म के प्रति विश्वास कम हो जाएगा।
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