तीसरे शाही स्नान के बाद अखाड़े और फिर प्रमुख संतों ने धीरे-धीरे करके संगम की रेती को विदा कह दिया। अब कई संत, आचार्य ही ऐसे हैं, जो माघी पूर्णिमा पर डुबकी लगाकर कल्पवासियों के साथ संगम की रेती से रवाना होंगे। शुक्रवार को पायलट बाबा भी गंगा को प्रणाम करके लौट गए।
फिलहाल रेती पर रुकने वालों में गंगा एक्शन परिवार के संयोजक और परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनिजी सहित आचार्य सुधांशु जी, आचार्य देवकीनंदन ठाकुर, नारायण साईं आदि शामिल हैं।
स्वामी चिदानंद के मुताबिक पूर्णिमा तक रेती पर प्रवास के दौरान गंगा के प्रति सेवा अनुष्ठान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माह भर से ज्यादा समय से गंगा का आशीष मिलता रहा है, उसी प्रकार वापसी से पहले निषादों, तीर्थ पुरोहितों सहित तकरीबन 45 देशों के गंगा भक्तों के साथ गंगा को निर्मल रखने के संकल्प के साथ तट की सफाई की जाएगी।
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती भी पूर्णिमा पर डुबकी के बाद ही कुंभ नगर से प्रस्थान करेंगे। इस दौरान याज्ञिक अनुष्ठान और प्रवचन होंगे। शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती रेती पर मंगलवार तक रुकेंगे। उनकी देखरेख में सेक्टर पांच स्थित शिविर में रविवार को करपात्री जी की पुण्यतिथि पर स्मृति सभा होगी।
शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती भी मंगलवार तक रुककर कई अनुष्ठान पूरे करेंगे। इसी तरह शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ भी पूर्णिमा को सर्वमंगल के लक्षचंडी यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद ही संगम की रेती से विदा होंगे। अग्नि अखाड़े के सभापति, सचिव आदि भी पूर्णिमा के बाद ही रेती छोड़ेंगे।