कुंभ मेला में अजब-गजब बाबाओं के बीच नागरमल बाजोरिया उर्फ धरती पकड़ भी घूमते नजर आ जाएंगे। सबसे ज्यादा चुनाव लड़ने का रिकार्ड अपने नाम कर चुके धरती पकड़ पूरे दिन साधु-संतों के शिविरों में व्यतीत करते हैं। उन्होंने गौवध के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। 85 साल की उम्र होने के बावजूद वह मेला क्षेत्र में बसे तमाम शिविरों में खुद पहुंचकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।
‘धरती पकड़’ लाहौर (पाकिस्तान) में पैदा हुए लेकिन कुंभ में सबसे यही कहते फिर रहे हैं कि भारत उनका घर और बिहार उनकी आत्मा है। तकरीबन 284 चुनाव लड़कर रिकार्ड बनाने चुके धरती पकड़ गर्व से कहते हैं कि पिछले राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें इतने वोट मिल गए कि उनकी जमानत राशि वापस हो गई। वह राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के 17 चुनाव लड़ चके हैं। बातचीत में उन्हें यह कहने में भी कोई संकोच नहीं कि कई बार उनकी जमानत भी जब्त हो चुकी है। वह यहां हफ्ते भर रुकेंगे।
इस दौरान लोगों से मिलकर उन्हें प्रेरित करेंगे कि वे अपने बच्चों को पढ़ाएं-लिखाएं, अच्छा इनसान बनाएं और गौवध के खिलाफ साथ मिलकर लड़ें। बकौल नागरमल बाजोरिया उन्होंने बिहार में 60 बीघा जमीन पर ‘धरती पकड़ नगर’ बना रखा है, जहां गौशालाएं और पाठशालाएं भी हैं।
उन्होंने गांव वालों से कह रखा है कि गाय दुधारू नहीं है तो उनकी गौशाला में छोड़ दें। ‘धरती पकड़’ बताते हैं कि उन्हें चुनाव लड़ने का शौक है लेकिन जीतने का नहीं। कहते हैं, ‘हमारे लोकतंत्र की महानता है कि सबको चुनाव लड़ने का अधिकार मिला लेकिन चुनाव जीते तो सिर्फ दागी ही कहलाएंगे। बताया इसी वजह से किसी भी चुनाव के लिए नामांकन कराने के बाद प्रचार-प्रसार नहीं करता हूं।’