बद्रीनाथ, केदारनाथ या राम जन्म भूमि (अयोध्या) का दर्शन करना हो तो कहीं जाने की जरूरत नहीं, संगम की धरती पर ही दर्शन हो जाएंगे। त्रिवेणी पुष्प अरैल में इन सभी मंदिरों के पुराने मॉडलों का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। सभी मॉडल हूबहू मंदिरों की तरह तैयार किए गए हैं ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को त्रिवेणी पुष्प में ही बद्रीनाथ, केदारनाथ और राम जन्मभूमि के दर्शन हो जाएं।
खास यह कि सभी मॉडल स्थाई हैं और निर्माण पक्का है, सो कुंभ के बाद ये मॉडल संगम नगरी को धरोहर के रूप में मिल जाएंगे। जीर्णोद्धार का काम इलाहाबाद विकास प्राधिकरण (एडीए) करा रहा है। सिर्फ इतना ही नहीं, त्रिवेणी पुष्प परिसर में सम्राट हर्षवर्धन बुद्ध विहार का मॉडल भी बना हुआ है लेकिन इसका निर्माण एडीए ने नहीं बल्कि एक निजी संस्था ने कराया है।
अरैल की तरफ भी लाखों कल्पवासी, संस्थाओं के सदस्य और साधु-संत तंबुओं की नगरी में बसने लगे हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है। ऐसे में त्रिवेणी पुष्प में बने इन मंदिरों के मॉडल का महत्व और बढ़ गया है। हालांकि इसमें सौंदर्यीकरण के कई और काम कराए जाने हैं और इन सब पर कुल 50 लाख रुपए की लागत आ रही है लेकिन कुंभ तक सभी काम पूरे नहीं हो सकेंगे। फिलहाल मंदिरों के पक्के मॉडल बनकर तैयार हो चुके हैं और प्रतिदिन वहां श्रद्धालुओं की भीड़ भी पहुंच रही है। शाम के वक्त वहां ज्यादा भीड़ जुट रही है।
बनना था तिरुपति बालाजी का मॉडल
त्रिवेणी पुष्प में पहले तिरुपति बालाजी मंदिर का भी मॉडल स्थापित किया जाना था। इसके लिए मेला प्रशासन ने मंदिर के ट्रस्टियों को त्रिवेणी पुष्प के लिए प्रस्ताव भी दिया था लेकिन वहां एक तरफ खाई होने और इधर-उधर गंदगी फैले होने के कारण ट्रस्टियों ने मना कर दिया। तिरुपति बालाजी के मंदिर का मॉडल अब सेक्टर छह में बनाया जा रहा है।
त्रिवेणी पुष्प के बगल में शराब की भट्ठी
त्रिवेणी पुष्प अरैल में प्रमुख मंदिरों के मॉडल तो तैयार कर दिए गए लेकिन प्रशासनिक अफसरों की नजर अब तक शराब की उस भट्ठी पर नहीं पड़ी, जो परिसर के ठीक बगल में स्थित है। परिसर के बाउंड्री वाल से सटी झोपड़-पट्टी पर महुए से कच्ची शराब बनाई जा रही है। महुए को सड़ाने के लिए खुले में रखकर छोड़ दिया गया है। वहीं पर एक पर्दा लगा है, जिसके पीछे अवैध रूप से कच्ची शराब बनाई जा रही है।